सेना की तरफ से साल 2013 तक मॉडर्न स्कूल दिल्ली में एक विजयंत टैंक, मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर में एक टी-55 टैंक, द मार्टिनियर कालेज लखनऊ और लॉवेरेंस स्कूल में एक टी-55 टैंक, पंजाब यूनिवर्सिटी में एक विजयंत, पंजाब पब्लिक स्कूल में टी-55 और रायपुर के राजकुमार कालेज में टी-55 टैंक रखे गए थे। इसके बाद जेएनयू के कुलपति एम जगदेश कुमार की तरफ से कैंपस में सेना के टैंक रखने की मांग की गई थी। जिसके बाद देशभर के कालेजों और विश्वविद्यालय से भी आवेदन किए जाने लगे। दिसंबर 2017 तक सेना के पास 31 आवेदन टैंक रखने के लिए आ चुके थे।
विवि के सिर्फ चार कॉलेजों में है डिफेंस स्टडीज विभाग
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संबंद्घ 66 कॉलेजों में से सिर्फ चार में ही डिफेंस स्ट्डीज है। मेरठ कॉलेज के अलावा हापुड़ के एसएसवी कॉलेज, पिलखुवा के राणा डिग्री कॉलेज के अलावा कैराना डिग्री कॉलेज में ये कोर्स है। मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्ट्डीज में विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत पांडे, डॉ. संजय कुमार, डॉ. अनुराग जायसवाल, डॉ. नवीन वर्मा और डॉ. मोहम्मद रिजवान के निर्देशन में दूसरे राज्यों के छात्र भी रिसर्च कर रहे हैं।
1965 और 1971 के युद्ध में हुए हैं इस्तेमाल
रूस के सहयोग से निर्मित विजयंत टैंक ने 1965 और 1971 के युद्घ में अहम भूमिका निभाई थी। भारतीय सेना के पुराने टैंकों को देश के महत्वपूर्ण स्थानों पर रखा जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ी सेना के योगदान के बारे में जान सके।
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