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ऐतिहासिक मेरठ कॉलेज की शान बढ़ाएगा सेना का विजयंत टैंक 

Mon, 29 Jan 2018 06:24 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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विजयंत टैंक - फोटो : अमर उजाला
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वेस्ट यूपी के ऐतिहासिक मेरठ कॉलेज में जल्द सेना का विजयंत टैंक अपनी दस्तक देने जा रहा है। सेना के अधिकारियों ने कॉलेज के डिफेंस स्टडीज विभाग को इसके लिए रजामंदी दे दी है। इससे मेरठ कॉलेज का नाम देश के उन नामचीन कॉलेजों में शुमार हो जाएगा, जहां पर विजयंत टैंक देखकर आने वाले छात्र-छात्राएं भारतीय सेना की आन-बान-शान से रूबरू होते हैं।

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1892 में बने मेरठ कॉलेज में सन 1939 को डिफेंस स्ट्डीज विभाग की शुरुआत हुई। उस वक्त यहां डिप्लोमा कोर्स था। सन 1972 में विषयों की शुरुआत हुई और फिर 1982 से पीएचडी होनी लगी। इसके बाद से विभाग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेना के बड़े 25 अधिकारी यहां से रिसर्च कर चुके हैं। सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत तक यहां से पीएचडी कर चुके हैं।

बता दें कि वर्तमान में सेना के चार बड़े अफसर मास्टर जनरल ऑर्डीनेंस लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामा राव निंबोरकर, ओटीए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल राजन रविंद्रा, टू स्ट्राइक कोर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नेगी और 12 रेपिड के जीओसी मेजरल जनरल ओपी गुलिया विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हेमंत पांडे और डॉ. संजय कुमार के निर्देशन में रिसर्च वर्क कर रहे हैं। यहां के प्रोफेसर ने मास्टर जनरल आर्डीनेंस से टैंक की मांग की थी। बताया था कि डिफेंस स्ट्डीज विभाग का अपना वार म्यूजियम तैयार हो गया है। जिसमें छात्रों को सेना और युद्घों के बारे में जानकारी मिलने लगेगी। डिफेंस स्ट्डीज विभाग की डिमांड पर मास्टर जनरल आर्डीनेंस ने रजामंदी दे दी है। विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत पांडे और डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मार्च में होने वाली नेशनल सेमिनार से पहले विजयंत टैंक मेरठ कॉलेज की शान बन जाएगा।

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जेएनयू के कुलपति की मांग के बाद बढ़ी डिमांड 

मेरठ कॉलिज - फोटो : अमर उजाला
सेना की तरफ से साल 2013 तक मॉडर्न स्कूल दिल्ली में एक विजयंत टैंक, मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर में एक टी-55 टैंक, द मार्टिनियर कालेज लखनऊ और लॉवेरेंस स्कूल में एक टी-55 टैंक, पंजाब यूनिवर्सिटी में एक विजयंत, पंजाब पब्लिक स्कूल में टी-55 और रायपुर के राजकुमार कालेज में टी-55 टैंक रखे गए थे। इसके बाद जेएनयू के कुलपति एम जगदेश कुमार की तरफ से कैंपस में सेना के टैंक रखने की मांग की गई थी। जिसके बाद देशभर के कालेजों और विश्वविद्यालय से भी आवेदन किए जाने लगे। दिसंबर 2017 तक सेना के पास 31 आवेदन टैंक रखने के लिए आ चुके थे। 

विवि के सिर्फ चार कॉलेजों में है डिफेंस स्टडीज विभाग 
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संबंद्घ 66 कॉलेजों में से सिर्फ चार में ही डिफेंस स्ट्डीज है। मेरठ कॉलेज के अलावा हापुड़ के एसएसवी कॉलेज, पिलखुवा के राणा डिग्री कॉलेज के अलावा कैराना डिग्री कॉलेज में ये कोर्स है। मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्ट्डीज में विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत पांडे, डॉ. संजय कुमार, डॉ. अनुराग जायसवाल, डॉ. नवीन वर्मा और डॉ. मोहम्मद रिजवान के निर्देशन में दूसरे राज्यों के छात्र भी रिसर्च कर रहे हैं।  

1965 और 1971 के युद्ध में हुए हैं इस्तेमाल 
रूस के सहयोग से निर्मित विजयंत टैंक ने 1965 और 1971 के युद्घ में अहम भूमिका निभाई थी। भारतीय सेना के पुराने टैंकों को देश के महत्वपूर्ण स्थानों पर रखा जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ी सेना के योगदान के बारे में जान सके।

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