मेरठ। बिजली चोरी में जुर्माना वसूलकर फर्जी रसीद थमाने के मामले में विद्युत निगम विजिलेंस टीम से जांच कराएगा। मेरठ जोन के चीफ इंजीनियर ने इसके निर्देश दिए हैं। इसके साथ विभागीय जांच भी होगी। उनका कहना है कि जांच के बाद फर्जीवाड़े के आरोपी बेनकाब होंगे।
विद्युत नगरीय वितरण खंड-तृतीय के तहत पिछले दिनों बिजली चोरी के जुर्माने की आड़ में उपभोक्ताओं से 1.5 लाख से ज्यादा रुपये ऐंठकर नकली रसीद देने का मामला सामने आया था। आरोप स्मार्ट मीटर लगाने वाली कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों पर लगे थे। ‘अमर उजाला’ ने उपभोक्ताओं के साथ हुए फर्जीवाड़े को प्रमुखता से उठाया था। आरोपियों के चेहरे भी बेनकाब किए थे। इसके बाद मेरठ जोन के चीफ इंजीनियर एसबी यादव ने अधीक्षण अभियंता एके सिंह को मामले की जांच सौंपी थी। मंगलवार को इस मामले में कई तथ्य और सामने आए। इसका संज्ञान लेते हुए चीफ इंजीनियर ने विजिलेंस से जांच कराने का निर्णय लिया।
फर्जीवाड़े के लिए बनाया फुलप्रूफ प्लान
तारापुरी निवासी जान मोहम्मद के यहां 13 नवंबर को स्मार्ट मीटर लगाया गया। मीटर लगाने आए कर्मचारियों ने पुराने मीटर में टेंपरिंग का आरोप लगा जान मोहम्मद पर जुर्माना लगाया। अगले दिन टीम के एक कर्मचारी ने 57 हजार रुपये जुर्माना लेकर फर्जी रसीद थमा दी। कनेक्शन कटने पर इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मीटर की एवज में उपभोक्ता को मिलने वाली रसीद तक पर कर्मचारी ने अपना नाम दर्ज नहीं किया। इन मीटरों का विवरण भी विभाग के समक्ष दर्ज नहीं कराया।
बिजली के लिए तरस रहे उपभोक्ता
फर्जी रसीद से जुड़े मामले में अभी तक चार से पांच उपभोक्ता सामने आए हैं। विभाग ने जुर्माने की धनराशि जमा न होने की बात कहकर उनकी बिजली काट रखी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जिन लोगों ने उनसे रुपये लिए हैं, वह विभाग के लिए काम करने वाली कंपनी के कर्मचारी थे। ऐसे में विभाग को उन ही कर्मचारी से रुपये वसूलने चाहिए। बिजली काटे जाने के कारण उनको परेशानी हो रही है।
जल्द जांच कराई जाएगी
मामला गंभीर है। इसकी जांच विजिलेंस से भी कराई जाएगी। इसको लेकर विभागीय अफसरों को निर्देश दिए गए हैं। जल्द आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी। - एसबी यादव, चीफ इंजीनियर, मेरठ जोन
बिना सूचना दिए खोले मीटर
राजस्व निर्धारण के नोटिस और मीटर खोले जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष हाजी अब्दुल समद ने मंगलवार को चीफ इंजीनियर से इसकी शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कर्मचारियों ने बिना सूचना के मीटर उतार लिया। मीटर खोलते समय भी उन्हें नहीं बुलाया। राजस्व निर्धारण का नोटिस भी बिना स्थलीय निरीक्षण के ऑफिस से ही भेज दिया। वह शिकायत लेकर अधिशासी अभियंता से मिले तो उन्होंने जुर्माना जमा करने का फरमान सुना दिया। चीफ इंजीनियर ने अधिशासी अभियंता को मीटर की वीडियोग्राफी दिखाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे कई मामलों में उपभोक्ताओं ने आरोप लगाए हैं।