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दर्द भरी दास्तां: कोठे से मुक्त युवती को नहीं मिला इंसाफ, मिलती है तो सिर्फ तारीख पर तारीख

Thu, 27 Sep 2018 06:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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12 साल पुराने देह व्यापार अधिनियम का मुकदमा छह साल से पुलिस की गवाही का इंतजार कर रहा है। ब्रह्मपुरी थाने की पुलिस ने न तो अभी तक अपने बयान दर्ज कराए और न ही आरोपियों को न्यायालय में पेश कर सकी। पुलिस की इस लचर पैरोकारी के चलते पीड़िता को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी हो रही है।
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यह था मामला
देह व्यापार के दलदल से निकली यह युवती मूल रूप से कोलकाता निवासी है। इस पीड़िता ने 16 मई 2006 को थाना ब्रह्मपुरी में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी थी। इसमें बताया गया था कि उसे गणेश नाम का एक व्यक्ति काम दिलाने के बहाने कोलकाता से दिल्ली लेकर आया था। कुछ दिन अपने पास रखने के बाद आरोपी गणेश ने उसे दिल्ली में जीबी रोड के रेड लाइट एरिया में एक कोठे पर बेच दिया था। वहां उसके साथ जबरन वेश्यावृत्ति कराई गई। 

दिल्ली से दलाल ने बेच दिया मेरठ 
पीड़िता के अनुसार दिल्ली के कोठे से संगीता नाम की एक महिला उसे उसके घर पहुंचाने के बहाने से मेरठ में कबाड़ी बाजार स्थित रेड लाइट एरिया में लेकर पहुंची थी। जहां उसे ऊषा के कोठे पर बेच दिया गया था। यहां भी उससे जबरदस्ती देह व्यापार कराया गया। 

 

मौका देखकर भागी तो थाने में पहुंची

दर्ज एफआईआर के अनुसार 16 मई 2006 को वह बाजार से सामान लाने के बहाने कोठे से भाग निकली थी। बदहवास हालत में वह शहर में ही एक चौराहे पर पहुंची और बस में चढ़ गई थी। जहां लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस इस युवती को थाने ले गई थी।

चार्जशीट की दाखिल
पुलिस ने पीड़िता से पूछताछ करने के बाद एफआईआर दर्ज करते हुए पीड़िता के पुलिस और न्यायालय में बयान दर्ज कराए। विवेचना के दौरान कई नाम सामने आए। विवेचक ने इस मुकदमे में विवेकानंद चौक, दिल्ली की रहने वाली संगीता व ऊषा निवासी सराय स्मिथगंज कबाड़ी बाजार के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत सात अगस्त 2012 को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। 
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साल 2012 से तलब, हाजिर नहीं

आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता लोकेश तोमर ने बताया कि उक्त मुकदमा वर्तमान में न्यायालय स्पेशल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन है। न्यायालय वर्ष 2012 से गवाहों को लगातार तलब कर रही है। लेकिन लगभग 80 तारीखें अदालत में लगने के बाद भी आज तक न तो पुलिस ने अपनी गवाही कराने की जहमत उठाई है और न ही इस मामले में आरोपियों को न्यायालय के तमाम आदेश के बावजूद भी पेश करना जरूरी समझा है।

न्यायालय लगातार तारीख पर तारीख लगा रही है और गवाहों को पेश करने के आदेश दे रही है। लेकिन पुलिस कुछ भी करने को तैयार नही है। न्यायालय ने अब इस मामले में गवाहाें की पेशी के लिए 15 अक्तूबर 2018 की तारीख नियत की हुई है। 

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