मेरठ की तलाक पीड़िता बुधवार को मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ पहुंची। महिला ने पुलिस पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाकर इंसाफ की गुहार लगाई है।
लखनऊ में अल्पसंख्यक विभाग द्वारा आयोजित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान भवन, गोमती नगर में आयोजित कार्यक्रम में तलाक पीड़िता हलीमा ने बताया कि डाक से आबिद द्वारा उसके घर पर नोटिस भेजा गया, जिसमें आबिद ने हलीमा को तीन तलाक देकर हमेशा के लिए रिश्ता खत्म कर देने की सूचना पहुंचाई। नोटिस प्राप्त होते ही वह थाना लिसाड़ी गेट पहुंची। करीब दो माह तक नोटिस की जांच करने पश्चात दिसंबर 2018 में तीन तलाक अध्यादेश के तहत मेरठ जोन का तीन तलाक का पहला मुकदमा लिसाड़ीगेट थाने में दर्ज हुआ।
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महिला ने सवाल उठाया कि उसके पति ने मेरठ में किसी अखबार में प्रकाशित न कराकर दिल्ली में तलाक की सूचना भी प्रकाशित करा दी। जबकि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। महिला ने कहा कि विवेचक ने तलाक विषय में अज्ञानता के चलते मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाकर मेरा व मेरे तीन वर्षीय पुत्र का जीवन बर्बाद करने की पटकथा लिख दी। लेकिन बाद में सीओ कोतवाली द्वारा दोबारा से जांच के निर्देश दिए गए। लेकिन आरोपी के विरुद्ध थाना पुलिस द्वारा आज तक भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। नए कानून के बाद भी पुलिस आश्वासन देती रही। महिला ने कहा कि अगले माह आरोपी तीसरा निकाह करने की तैयारी कर रहा है, और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। महिला ने इंसाफ की मांग की है।
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