विकेट कीपर और शानदार बल्लेबाजी
- फोटो : अमर उजाला
विक्की महज 9वीं कक्षा तक पढ़ा हुआ है। पिता लीलू सिंह की कई साल पूर्व मृत्यु हो चुकी है। परिवार में बड़े भाई राजेंद्र कुमार हैं। विक्की ने बताया कि दिव्यांगता के कारण पहले तो उसके मन में मायूसी ती थी, लेकिन फिर मन में आया कि मैं भी कुछ ऐसा करूं, जिससे परिवार, गांव, जिले और देश का नाम रोशन हो। उसने एक बार टीवी में व्हीलचेयर क्रिकेट देखा, तो उसने भी क्रिकेटर बनने की ठान ली। काफी समय तक गांव में ही क्रिकेट खेलता रहा। 2010 में अपने एक रिश्तेदार के जरिये वह दिल्ली में आयोजित क्रिकेट मैच खेलने गया और वहां अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद यूपी, चंडीगढ़ और दिल्ली की टीम के साथ खेलना शुरू कर दिया। फरवरी 2018 में उसने गाजियाबाद में नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 50 गेंद पर 98 रन बनाकर वाहवाही बटौरी। प्रतियोगिता में उसे बेस्ट बल्लेबाज और मैन ऑफ द सीरिज चुना गया।
क्रिकेट में शामली का बढ़ता दबदबा
क्रिकेट की दुनिया में शामली का नाम लगातार रोशन हो रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम में रहे प्रवीण कुमार उर्फ पीके शामली जिले के गांव लपाना के मूल निवासी हैं। वहीं, गांव भैंसवाल निवासी विनीत पंवार अंडर 19 टीम में चयन हुआ था और फिर रणजी ट्राफी भी खेल चुका है। अब गांव हिरनवाडा के दिव्यांग विक्की ने क्रिकेट के जगत में जिले का नाम रोशन किया है।
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