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बेहतर इलाज के दावे फेल : नहीं मिला वेंटिलेटर, मुरादनगर के युवक ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ा

Tue, 20 Apr 2021 02:11 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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मेरठ अस्पतालों में वेंटिलेटर युक्त बेड फुल हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन मरीजों को बेहतर इलाज के तमाम दावे कर रहा है, लेकिन यह महज दावे ही हैं। हकीकत इससे इतर है। यह लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

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ऐसा ही हुआ मुरादनगर के 32 वर्षीय संदीप कुमार के साथ। उसे सांस लेने में दिक्कत थी। गाजियाबाद से लेकर मेरठ तक वह वेंटिलेटर के लिए तड़पता रहा। सांस फूलती रही और नतीजतन उसने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

मृतक के मामा भूषण ने बताया कि वह गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती था। वहां से उसे वेंटिलेटर की सुविधा न मिलने पर परिजनों ने दिल्ली, नोएडा और मेरठ में अपने परिजनों से परिचित से संपर्क किया। इस उम्मीद पर कि मेरठ में किसी अस्पताल में वेंटिलेटर मिल जाएगा वह मेरठ आ गए।
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अधिवक्ता राम कुमार शर्मा से संपर्क किया। निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर के लिए कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं बनी। गढ़ रोड स्थित एक अस्पताल के बाहर वेंटिलेटर के लिए करीब आधे घंटे तक वह इंतजार करते रहे, लेकिन अस्पताल के अंदर से जिम्मेदारों का जवाब आता रहा कि बेड फुल है, वेंटिलेटर वाले बेड की सुविधा नहीं है।

इस तरह सांस आनी बंद हो गई और युवक की मौत हो गई। परिजन मेरठ के चार बड़े अस्पतालों में करीब डेढ़ घंटे तक कोशिश करते रहे। यह मामला पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाता है। अस्पतालों में किस तरह की व्यवस्था है। ऑक्सीजन के लिए मरीज परेशान हैं और वेंटिलेटर के लिए तड़प रहे हैं।

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