सब्जी विक्रेता का अपहरण कर दोस्तों ने वसूले 2.20 लाख
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। गांव दुर्गनपुर निवासी सब्जी विक्रेता को उसके दोस्तों ने दावत के बहाने ले जाकर अपहरण कर लिया और उसके परिजनों से 2.20 लाख की फिरौती वसूल ली। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर वसूली गई रकम में से 1.98 लाख रुपये बरामद कर लिए हैं। दो आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के गांव दुर्गनपुर निवासी लोकेंद्र सब्जी विक्रेता है। सात अगस्त की शाम लोकेंद्र को गांव का ही उसका दोस्त अजय अपने कुछ दोस्तों के साथ दावत के बहाने कांधला ले गया था। वहां से लौटते समय लोकेंद्र व अजय को उनके दोस्तों ने गांव दुर्गनपुर के जंगल में बंधक बना लिया। हत्या की धमकी देकर लोकेंद्र के परिजनों से 2.20 लाख रुपये की मांग की। विरोध करने पर लोकेंद्र के साथ मारपीट की गई। देर रात अजय को लोकेंद्र के घर भेजकर 2.20 लाख रुपये मंगवाने के बाद सब्जी विक्रेता को छोड़ा गया। पीड़ित लोकेंद्र ने पुलिस को शनिवार को घटना की जानकारी दी, जिस पर एसपी देहात नेपाल सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। सीओ गिरिजाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि शनिवार रात दुर्गनपुर के जंगल में मुठभेड़ के दौरान अजय समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से वसूली गई फिरौती की रकम में से 1.78 लाख रुपये व दो तमंचे-कारतूस बरामद कर लिए गए। पकड़े गए आरोपियों में विमल व अजय, निवासी गांव दुर्गनपुर, अमित निवासी गांव टिकरी दोघट बागपत, सचिन, अंकित व हरेंद्र निवासीगण गांव रंछाड़ बिनौली बागपत व दीपक सोलंकी निवासी गांव जिवाना बिनौली बागपत शामिल हैं। आरोपियों से पूछताछ के बाद एक अन्य आरोपी विक्रम लुहार निवासी टीकरी, बागपत को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से भी 20 हजार रुपये व तमंचा-कारतूस बरामद किया गया। बुढ़ाना इंस्पेक्टर ने बताया कि घटना में शामिल दो अन्य आरोपी प्रवीण निवासी दुर्गनपुर व शेरू निवासी गांव जिवाना, बिनौली बागपत फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को जेल भेज दिया है।
आर्थिक तंगी से उबरने को रची गई साजिश
मुजफ्फरनगर/बुढ़ाना। कोविड-19 के चलते लागू लॉकडाउन में आई आर्थिक तंगी से उबरने के लिए गांव दुर्गनपुर निवासी सब्जी व्यापारी लोकेंद्र से रुपये वसूलने की योजना उसी के घनिष्ठ मित्र दुर्गनपुर के ही अजय ने बनाई थी। दरअसल, सब्जी कारोबारी लोकेंद्र के पास हर समय नकद धनराशि मौजूद रहती थी, जिसकी जानकारी अजय को थी। सात अगस्त की शाम दावत देने के बहाने लोकेंद्र को बुला लिया। साजिश के तहत आरोपियों ने लोकेंद्र के साथ ही अजय को भी बंधक बनाया गया, ताकि लोकेंद्र को शक न हो और अजय को ही उसके घर भेजकर रकम मंगाई जा सके। हुआ भी ऐसा ही, देर रात लोकेंद्र के कहने पर आरोपियों ने अजय को उसके घर भेजकर 2.20 लाख रुपये की रकम मंगा ली, जिसके बाद दोनों को छोड़ दिया गया। जिस तरह से घटित हुई, उससे लोकेंद्र को अजय पर शक हो गया। लोकेंद्र ने पुलिस को तहरीर देते हुए अजय पर ही शक जाहिर किया। इसके बाद पूछताछ में अजय ने पूरी साजिश उगल दी।
डकैती की धाराओं में दर्ज किया मामला
मुजफ्फरनगर। अपहरण, बंधक बनाने व फिरौती वसूलने की वारदात को जहां पुलिस ने डकैती में दर्ज किया, वहीं चार अन्य मुकदमे बलवा, जानलेवा हमला व आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किए गए। सूबे में अपहरण की घटनाएं इस समय सर्वाधिक चर्चाओं में हैं। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में हाल ही में एक के बाद एक अपहरण की कई घटनाएं सामने हुईं हैं, जिनमें से कुछ पीड़ितों की हत्या भी कर दी गई है। ऐसे में सब्जी विक्रेता लोकेंद्र का अपहरण व फिरौती वसूलने की वारदात भी सुर्खियां न बन जाए, इससे बचने के लिए बुढ़ाना कोतवाली पुलिस ने इसे दर्ज करने में ‘खेल’ कर दिया। पुलिस ने लोकेंद्र की ओर से डकैती व बरामदगी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अपनी ओर से भी आरोपियों के खिलाफ चार मुकदमे दर्ज किए हैं। इनमें एक में धारा 147/148/149/307 आईपीसी, दूसरे में 3/25/27 ए एक्ट, तीसरे में 3/25/27 ए एक्ट और चौथे में 3/25 ए एक्ट की धाराएं लगाई गई है।
इन्होंने कहा ..........
एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि घटना में पांच से अधिक आरोपी शामिल थे, इसलिए इसे डकैती-बरामदगी में दर्ज किया गया है। जांच में अपहरण या फिरौती वसूलने जैसी बात सामने नहीं आई।
बड़ा सवाल
बुढ़ाना कोतवाली पुलिस की जांच में अपहरण या फिरौती जैसी बात सामने नहीं आई, लेकिन प्रेस को जारी बयान में पुलिस ने लोकेंद्र को बंधक बनाने और डरा-धमकाकर 2.20 लाख रुपये वसूलने की बात लिखी है। यही नहीं, इंस्पेक्टर केपी सिंह का कहना है कि अजय को लोकेंद्र के घर भेजकर रुपये मंगाए गए, जिसके बाद उन्हें छोड़ा गया। अब जबकि पुलिस इन सभी आरोपों को स्वीकार कर रही है, तो इसके बावजूद पुलिस ने अपहरण व फिरौती में मामला क्यों दर्ज नहीं किया ? यह एक सवाल है।