शहर के सभी मंदिरों में होंगे आयोजन
बाबा औघड़नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. महेश बंसल के अनुसार वसंत पंचमी की पूजा दोपहर होगी। बाबा मनोहरनाथ मंदिर की महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर गुरु मां निलिमानंद महाराज के अनुसार मंदिर में महाआरती और मां सरस्वती की विशेष पूजा की जाएगी। इसी क्रम में शहर के विभिन्न मंदिरों सहित सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
होलिका दहन स्थान पर होगा पूजन
होलिका दहन से पहले होली बनाने की प्रक्रिया चालीस दिन पहले ही वसंत पंचमी के दिन शुरू हो जाती है। इस दिन गूलर वृक्ष की टहनी को गांव या मोहल्ले में या जिस जगह पर होली का दहन किया जाना होता है या किसी खुली जगह पर गाड़ दिया जाता है। इसे होली का ठुंडा गाड़ना भी कहते हैं।
बसंत-पंचमी के दिन से ही होली की शुरुआत व निश्चित दहन स्थान में होली का ठुंडा गाढ़ने की भी परम्परा रही है। इसीलिए आज ही के दिन जगह-जगह पूजा-अर्चना करने के साथ होलिका बनाने की भी शुरुआत हो जाती है।
होलिका दहन के दौरान जो ठुंडा पहले गड़ा था उसे जलती होली से बाहर निकालकर तालाब आदि में या दूर ले जाकर रखा जाता है। इस तरह इसे प्रह्लाद का रुप मानकर उसकी रक्षा की जाती है। डंडा निकालने वाले को पुरस्कृत भी किया जाता है।
होलिका स्थान पूजन ठुंडा गाढ़ना : शुभ मुहूर्त गुरुवार 30 जनवरी
प्रात- 07:10 से 08:31 तक शुभ की चौघड़िया में या
दोपहर- 12:34 से 01:00 के मध्य लाभ चौघड़िया में।
उत्तम रहेगा : निश्चित स्थान पर गंगा जल से शुद्ध कर दूध का छिंटा देकर डंडा गाडकर रंगोली बना दे व कुछ शुभ लकड़ियां गूलर ,नीम, आदि को रख दें।
आज से ब्रज में होली की शुरुआत
दुनिया के कोने कोने में हिंदू समाज के लोग वसंत पंचमी का त्यौहार मनाते हैं। बृजभूमि में इस त्यौहार का एक अपना अलग ही रंग अलग ही महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बृज में वसंत पंचमी से ही 40 दिन के होली के पर्व की शुरुआत हो जाती है।
वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में भी वसंत पंचमी की इस होली का नजारा बेहद मन भावन होता है। परंपरा के अनुसार आज के दिन मंदिर में शृंगार आरती के बाद सबसे पहले मंदिर के पुजारी भगवान बांके बिहारी को गुलाल का टीका लगाकर होली के इस पर्व की विधिवत शुरुआत करते है।