इस अपराध में देश में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन सालों के आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश इस घिनौने अपराध में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर पश्चिमी बंगाल है, जबकि राजस्थान तीसरे और असम चौथे स्थान पर है।
2016 में उत्तर प्रदेश में पतियों द्वारा पत्नियों के कत्ल की 11,156 घटनाएं हुईं। 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 12,653 हो गया और 2018 की रिपोर्ट के अनुसार साल भर में 14,233 पतियों ने पत्नियों को मार डाला। वहीं पहले पायदान पर पश्चिमी बंगाल में 2016 में 19,302 केस, 2017 में 16,800 व 2018 में 16951 केस दर्ज हुए।
अन्य राज्यों में इस अपराध का आंकड़ा कम हुआ है। लेकिन उत्तर प्रदेश में यह बढ़ा है। राजस्थान में 2016 में 13811 मामले, 2017 में 11508 व 2018 में 12250 मामले दर्ज हुए। असम में 2016 में 9321, 2017 में 9782 व 2018 में 11136 मामले दर्ज हुए हैं।
पति-पत्नी के बीच छोटी सी बातों को लेकर विवाद हो रहा है। वैचारिक मतभेद के कारण आपसी सामंजस्य में परेशानी आ रही है। लोगों में सहनशीलता खत्म हो रही है। आवेश में आकर वह इस तरह का कदम उठा रहे हैं। - डॉ. कशिका जैन मनोचिकित्सक
मेरठ में ये मामले रहे प्रमुख
13 मार्च 2018 में बहसूमा के अनुज ने पत्नी ममता की हत्या कर दी। 27 मार्च को कंकरखेड़ा के प्रवीण पाल ने पत्नी विमलेश को मार डाला। 2 अप्रैल 2018 में कोतवाली की ज्योति को पति अमित ने मार डाला। 8 सितंबर को लिसाड़ीगेट की रिजवाना को पति जावेद ने मार दिया। 7 मई को खरखौदा की लक्ष्मी की हत्या पति बबलू ने कर दी। 18 जुलाई को पल्लवपुरम निवासी दीपक ने पत्नी प्रीति को मार डाला। 15 अगस्त को किठौर के खालिद ने पत्नी गुलशन को मौत के घाट उतार दिया। 2019 जनवरी में रोहटा के अजय ने पत्नी मनिता की हत्या कर दी।
पश्चिमी उप्र में पतियों द्वारा कत्ल की भयावह स्थिति
| शहर |
2016 |
2017 |
2018 |
| गाजियाबाद |
526 |
575 |
483 |
| मेरठ |
488 |
601 |
544 |
| मुज्जफरनगर |
280 |
166 |
112 |
| गौतमबुद्धनगर |
262 |
233 |
297 |
| बुलंदशहर |
253 |
394 |
493 |
| बिजनौर |
172 |
188 |
177 |
| सहारनपुर |
114 |
125 |
117 |
| शामली |
120 |
123 |
119 |
| बागपत |
103 |
96 |
81 |
| हापुड़ |
40 |
76 |
76 |
| |
|
|
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पुलिस की विवेचना अहम
ऐसे मामलों में पुलिस की विवेचना अहम है, क्योंकि महिला अपराध के मामले जो मुकदमे लिखाए जाते हैं, उनमें अपने ही गवाह होने के कारण बाद में वह मुकर जाते हैं।
- चौधरी प्रेरणा वर्मा, उपाध्यक्ष मेरठ बार
स्थिति बेहद खराब
पश्चिमी उप्र में महिलाओं पर अपराध की स्थिति बेहद भयावह है। पुलिस, प्रशासन को इस मामले में गंभीर होना पड़ेगा। अपनों के हाथों ही महिलाओं का कत्ल बेहद शर्मनाक स्थिति है। - अतुल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता