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यूपी: भिंडी की फसल को रोगमुक्त बनाएगा सीसीएसयू, 40 लाख के अनुदान से होंगे शोधकार्य 

Wed, 16 Jan 2019 01:41 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र प्रताप - फोटो : अमर उजाला
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भिंडी की फसल में लगने वाली बीमारियों को दूर करने में अब सीसीएसयू मेरठ अहम भूमिका निभाएगा। कैंपस के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर को एक प्रोजेक्ट के लिए साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड नई दिल्ली द्वारा 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। शोध से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा तमाम किसानों को इसका बड़ा फायदा मिलेगा।

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कई तरह के प्रोटीन व पोषक तत्वों से भरपूर भिंडी उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। भिंडी भारत के कई राज्यों तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रमुखता से उगाई जाती है। भिंडी की फसल को वायरस से तकरीबन 40-50 फीसदी तक नुकसान पहुंचता है। येलो मोजेक एवं इनेशन लीफ कर्ल वायरस जनित रोग भिंडी के सब से खतरनाक रोग हैं। यह दोनों ही वायरस सफेद मक्खियों द्वारा फैलते हैं।

वायरस से होने वाले इन रोगों की वजह से कई बार पूरी फसल चौपट हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र प्रताप को साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड नई दिल्ली द्वारा भिंडी में लगने वाले वायरस रोगों की रोकथाम एवं संबंधित शोध कार्य के लिए 40 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ है। 

डॉ. प्रताप के प्रोजेक्ट स्टडी ऑफ जेनेटिक वरिएबिलिटी एंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ बेगमोवायरस एसोसिएटेड विद इनेशन लीफ कर्ल डिजीज ऑफ ओकरा इन इंडिया को संस्तुति प्रदान की गई है। डॉ. प्रताप के अनुसार इस प्रोजेक्ट से किए गए शोध व अनुसंधान से इन वायरस में पाई जाने वाली जेनेटिक डाइवर्सिटी तथा भिंडी की वायरस प्रतिरोधी वैरायटी उन्नत करने में बहुत मदद मिलेगी। जिससे भिंडी के खेती करने वाले किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
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डॉ. धर्मेंद्र प्रताप के अनुसार इस प्रोजेक्ट के द्वारा कॉलेज के शिक्षकों एवं वायरस में शोध कार्य करने के इच्छुक विद्यार्थियों की एडवांस वायरस रिसर्च की ट्रेनिंग का भी प्रावधान है। इसे विभाग में स्थापित की गई मॉलीक्यूलर वाइरालजी लैब में पूरा किया जा सकता है। जिससे कैंपस तथा कॉलेज के विद्यार्थी लाभान्वित हो सकेंगे। यह प्रोजेक्ट तीन साल के लिए 2021 तक मिला है। 

आईएसओ से प्रमाणित हुआ सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग 
चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर के सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग को आईएसओ से प्रमाणित कर दिया गया है। सात नवंबर को एक टीम डॉ. अनुज गोयल, निदेशक आईएसओ की अध्यक्षता में विभाग का निरीक्षण करने आई थी।

प्रति कुलपति एवं विभागाध्यक्षा प्रो. वाई विमला ने बताया कि आईएसओ के प्रमाण के बाद विभाग के मेडिकल माइक्रोबायोलोजी को एमसीआई की मान्यता व एप्लाईड माईक्रोबायोलोजी पाठ्यक्रम के छात्रों की रोजगार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। बता दें कि सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग मेरठ का एकमात्र आईएसओ प्रमाणित विभाग है, जिसको यह उपलब्धि प्राप्त हुई है। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने एचओडी व विभाग के समस्त शिक्षक, छात्र-छात्राओं को उपलब्धि पर बधाई दी है।

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