मुजफ्फरनगर में उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन में सवार यात्रियों की जिंदगी से जानबूझकर खिलवाड़ किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस कदर लापरवाही बरती कि चंद मिनटों में 26 जिंदगी मौत के आगोश में समा गईं।
जीआरपी थाने में दर्ज रिपोर्ट में काफी हद तक हादसे की तस्वीर साफ हो रही है, जिसमें सीधे रूप से पटरी बदलने वालों के साथ स्टेशन अधिकारियों और कर्मचारियों को भी प्रथमदृष्टया दोषी बनाया गया है। हादसे की जांच में फाइनल रिपोर्ट लगते ही गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू किया जाएगा। दिल्ली-टपरी रेल मार्ग पर 19 अगस्त को 17.45 बजे खतौली के किलोमीटर के खंभा 101/4 पर पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई थी। हादसा इतना भयावह था कि उत्कल के 13 डिब्बों के पटरी से उतरने के साथ परखचे उड़ गए। हादसे में 26 यात्रियों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक घायल हुए। हादसे की खतौली जीआरपी चौकी इंचार्ज एसआई अजय कुमार ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
ब्लॉक और कॉशन तक नहीं लिया
हुआ था भीषण रेल हादसा
रिपोर्ट में साफ है कि 19 अगस्त को पुरी से हरिद्वार जाने वाली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस खतौली में रनथ्रो तेज स्पीड से गुजरी। इससे पहले पटरी पर बदलने का काम लापरवाही से किया जा रहा था। रेलवे के अधिकारियों, कर्मचारियों ने उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाते हुए ब्लॉक और कॉशन तक नहीं लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पटरी बदलने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ ही घटना के दिन रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी पर नियुक्त अधिकारियों, कर्मचारियों ने भी लापरवाही बरती, जिसके कारण ट्रेन हादसे का शिकार हुई। ऐसे में साफ है कि रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्कल ट्रेन में सवार यात्रियों की जिंदगी से जानबूझकर खिलवाड़ किया, जिसके चलते यात्री अकाल मौत का शिकार हो गए। सीओ जीआरपी गाजियाबाद रणधीर सिंह ने बताया कि अभी जांच में वक्त लगेगा। विवेचना जारी है, दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी।
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