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भगवान कृष्ण ने की उत्तरा के गर्भ की रक्षा: रविशंकर

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कंकरखेड़ा पैठ बाजार मंदिर महादेव में श्रीमद्भागवत कथा
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राजा परीक्षित जन्म, श्राप और सुखदेव आगमन का प्रसंग सुनाया

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। कंकरखेड़ा पैठ बाजार स्थित मंदिर महादेव में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। कथा के प्रथम दिवस नैमिषारण्य तीर्थ से आए कथा व्यास रविशंकर महाराज ने राजा परीक्षित के जन्म, उन्हें प्राप्त श्राप तथा सुखदेव महाराज के आगमन का विस्तार से वर्णन किया।
कथा व्यास ने बताया कि महाभारत युद्ध के बाद जब अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु का जीवन संकट में पड़ गया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से गर्भस्थ शिशु की रक्षा की। यही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित कहलाए। भगवान के दिव्य स्वरूप का गर्भ में ही दर्शन प्राप्त प्राप्त हुआ। ऐसे में उनका नाम परीक्षित पड़ा।
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महाराज ने आगे बताया कि ऋषि के पुत्र के श्राप के कारण राजा परीक्षित को सात दिन में तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का ज्ञान हुआ। इसके बाद उन्होंने राजपाट त्यागकर गंगा तट पर शुकदेव महाराज से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। इससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
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संयुक्त व्यापार संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज मित्तल,पंडित संजय त्रिपाठी, कृष्ण कुमार गुप्ता, मदन गुप्ता, पार्षद बबीता खन्ना, रिंकू गोयल, मनोज मित्तल, रामगोपाल शर्मा आदि रहे।

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