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चकबंदी के विरोध में बिसौला के ग्रामीणों का हंगामा

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चकबंदी के विरोध में बिसौला के ग्रामीणों का हंगामा
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मवाना। गांव बिसौला के ग्रामीणों ने मंगलवार को चकबंदी के विरोध में तहसील में हंगामा किया तथा एक पत्र जिलाधिकारी के नाम दिया। एडीएम प्रशासन द्वारा जांच कराने के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए।
गांव बिसौला के ग्रामीणों ने तहसील दिवस पर जिलाधिकारी के नाम सौंपे पत्र में कहा कि उनके गांव में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। जबकि ग्रामीण चकबंदी नहीं कराना चाहते हैं। चकबंदी अधिकारी व कर्मचारी अपनी मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं। छोटे-छोटे किसानों के चक एक साथ न करके तीन-तीन छोटे-छोटे चक बना दिए हैं। जो एक-दूसरे से बहुत दूर हैं। सड़क से लगे खेतों की कीमत कम लगाकर पीछे के खेतों की कीमत अधिक लगाई है। चकबंदी कार्यालय में भ्रष्टाचार चर्म सीमा पर है। किसानों की ट्यूबवेलों से उनके चक अलग काट दिए हैं। मूल जोत से भी अलग चक कर दिए हैं। ग्रामीणों ने न्यायहित में गांव बिसौला को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर किए जाने की मांग की। एडीएम प्रशासन मदन सिंह गब्रयाल ने उन्हें जांच का आश्वासन दिया।
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तालाब की भूमि पर कब्जे का आरोप
मवाना। गांव राफन के प्रधान ने जिलाधिकारी के नाम तहसील दिवस में दिए पत्र में तालाब की भूमि पर कब्जा कर बेचे जाने का आरोप लगाया है।
ग्राम प्रधान जितेंद्र कुमार ने ज्ञापन में कहा कि गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर बदमाश ने तालाब की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर करीब 800 वर्ग मीटर भूमि बेच दी है। आरोपी ने अन्य व्यक्ति को भी तालाब की भूमि बेची है। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर तालाब की भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाए।
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वहीं, दूसरे शिकायती पत्र में ग्राम प्रधान ने कहा कि गांव के मुख्य रास्ते के पास करीब तीन बीघा जमीन कूड़ा डालने के लिए गांववासियों को दी गई थी। उक्त जमीन को कुछ दबंगों ने खेत में दबा लिया है तथा गांव वाले सड़क किनारे कूड़ा डाल रहे हैं। जिससे बीमारी का खतरा बना हुआ है। जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त कराई जाए।
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