उत्तर प्रदेश के मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में गठबंधन प्रत्याशी का हार का कारण सपा के अपने ही जिम्मेदार रहे हैं। इस चुनाव में उनकी भूमिका संदिग्ध रही है। इस संबंध में रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो आज सपा मुखिया अखिलेश यादव को भेजी गई है। इस रिपोर्ट के बाद कई सपा नेताओं पर गाज गिर सकती है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि सपा नेताओं में आपसी कलह सबसे बड़ी वजह रही। जिम्मेदारों से सवाल किए गए हैं कि यह पता होने के बावजूद कि प्रस्तावक भाजपा वालों से मिल गया है, उसे फिर भी प्रस्तावक क्यों बनाया। जब बना दिया था तो उसे अपने से अलग क्यों किया। नॉमिनेशन के बारे में जिलाध्यक्ष तक को नहीं बताया गया। दूसरी तरफ अपनी पार्टी के सदस्य जीते हुए होने के बावजूद प्रस्तावक और अनुमोदक उनमें से क्यों नहीं बनाए गए। इन सवालों के संबंध में अपनी सफाई में जो जवाब खासकर दो सपा नेताओं ने दिए हैं। उन्हें रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
मेरठ में सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी का पर्चा निरस्त होने के कारण भाजपा की जीत हुई। समाजवादी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। सपा प्रत्याशी सलोनी गुर्जर के अनुमोदक द्वारा अनुमोदन से ही इनकार करने पर निर्वाचन अधिकारी ने सलोनी का पर्चा निरस्त कर दिया था। हार के पीछे सपाइयों की अंतर्कलह, गुटबाजी साफ सामने आई थी।
जो सच है वही रिपोर्ट में देंगे
जो सच है, वही रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस संबंध में महानगर अध्यक्ष और जिला महासचिव के साथ रिपोर्ट तैयार कर 13 जुलाई तक भेज दी जाएगी।
- राजपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, सपा