पुलिस के मुताबिक गांव केरटू में 18 जुलाई 1999 को रतन सिंह, रामकिशन और कर्म सिंह की हत्या हुई थी। उसमें केरटू निवासी धर्मेंद्र उर्फ धन्ना और उसके भाई सुधीर उर्फ बिट्टू को वर्ष 2005 में न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में दया याचिका पर उनकी सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था। इसके बाद धर्मेंद्र और सुधीर मार्च 2017 में पेरोल पर छूटकर जेल से बाहर आए थे। तीन मई 2017 को पेरोल का समय पूरा होने पर भी वह न्यायालय में पेश नहीं हुए और फरार हो गए थे। इसके बाद से पुलिस को सजायाफ्ता की तलाश थी।
25 हजार रुपये का इनामी था धर्मेंद्र
पेरोल अवधि पूरी होने के बाद धर्मेंद्र अपने भाई सुधीर के साथ लापता हो गया था। पुलिस ने उसको तलाश किया था, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा था। वहीं, तिहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार के लोगों द्वारा पुलिस से शिकायत कर आरोपियों से अपनी जान को खतरा बताया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने धर्मेंद्र और सुधीर पर 25-25 हजार रुपये इनाम घोषित कराने की संस्तुति की गई थी।
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