पांच सीओ, 12 इंस्पेक्टर व 45 दरोगा की दूरस्थ जिलों में पोस्टिंग हैं, लेकिन उनका डेरा पुलिस लाइन और थाना परिसरों में यथावत है। दूसरे जिलों से ट्रांसफर पर आने वाले या तो किराये पर या फिर जुगाड़ से पीडब्ल्यूडी के क्वार्टरों में रह रहे हैं। समस्या बड़ी है और इससे अधिकारी भी परेशान हैं, लेकिन उससे भी बड़ी समस्या है कि यह उन लोगों के कारण है जिन के कांधों पर कानून की जिम्मेदारी है। इन अवैध कब्जों को खाली करने के लिए पांच बार नोटिस जारी हो चुके हैं। अब वेतन कटौती की तैयारी की गई है।
एसपी सिटी का सरकारी बंगला तीन महीने से खाली नहीं हुआ है। यहां गेट पर लगी नेमप्लेट तक बदल दी गई है। बंगले का सीयूजी नंबर से भी लोगों को कोई रेस्पांस नहीं मिल रहा है। एसपी सिटी आवास के गेट पर केवल एसपी की नेमप्लेट लगी। यहां एडीजी के स्टाफ ऑफिसर (एसपी) श्रीप्रकाश द्विवेदी रहते हैं, दो माह मेरठ में एसपी सिटी रहे। पद से हटने के बाद भी यहीं रह रहे हैं।
एसपी सिटी रणविजय सिंह अपना सरकारी बंगला खाली नहीं करा सके। फिलहाल पीडब्ल्यूडी के दो कमरे के एक क्वार्टर में रहते है। सवाल उठता है कि क्या पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। मेरठ में एडीजी, आईजी और एसएसपी भी हैं, लेकिन कोई बोलने को तैयार नहीं। जबकि पुलिस विभाग में कई बार एसपी सिटी को अपने आवास पर सीओ और थानेदारों की मीटिंग भी लेनी होती है। लेकिन व्यवस्था पटरी से उतर गई है।
क्वार्टरों पर अवैध कब्जे की पुलिस अधिकारियों को जानकारी है, लेकिन सब खामोश हैं। एक के बाद एक अधिकारी जिले में आए और चले गए। लेकिन इस प्रकरण में कोई बोलने को तैयार नहीं है। तत्कालीन एसएसपी जे. रविंदर गौड ने क्वार्टर खाली कराने के लिए नोटिस भेजे लेकिन क्वार्टर खाली नहीं किया।
एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि सरकारी क्वार्टरों में अवैध तरीके से रहने वाले पुलिसकर्मियों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। सरकारी किराया जमा न करने वाले और अवैध तरीके से रहने वाले पुलिस वालों की सूची तैयार की जा रही है। अब पुलिस वालों के वेतन काटने की तैयारी चल रही है। इसको लेकर एचआर विभाग से बात हो चुकी है।
सीओ, इंस्पेक्टर के कब्जे
सीओ एमपी सिंह, सीओ बीएस वीर कुमार, सीओ विनोद कुमार सिरोही समेत पांच सीओ के मेरठ जनपद से दूसरे जनपदों में ट्रांसफर हो चुके हैं। वहीं 12 इंस्पेक्टर, 45 दरोगा और 55 पुलिसकर्मियों के लाइन और थाने के क्वार्टरों में अवैध कब्जे हैं। कई बार पुलिस अधिकारियों ने क्वार्टर खाली कराने के नोटिस जारी किए, लेकिन र्कोई असर नहीं हुआ। इन सभी पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर दूरदराज जनपदों में हो चुके हैं।
एडीजी के आदेश भी हवा में
घनी बारिश के चलते इमारतें गिरते देख एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने जर्जर बिल्ंिडग में रहने वाले पुलिस वालों को निर्देश दिए थे कि वह क्वार्टर खाली कर दें। लेकिन एडीजी के इस निर्देश को भी पुलिसकर्मियों ने हवा में उड़ा दिया। मेरठ जनपद में एक भी पुलिस वाले ने अपना क्वार्टर खाली नहीं कराया।