किसानों के बंटने से कमजोर हुई भाकियू
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बाद किसानों के कई संगठन बनने से भाकियू और किसानों की एक जुटता कमजोर हुई। पश्चिमी यूपी में भाकियू के अलावा भाकियू अम्बावता, भाकियू तोमर, भाकियू भानू, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, भारतीय किसान संगठन सक्रिय है। बिजनौर में भी करीब दस भाकियू संगठन है। बागपत से जिले से भारतीय किसान यूनियन, भारतीय किसान संगठन, भारतीय मजदूर किसान संगठन, अन्नदाता भारतीय किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान अधिकार समन्वय मंच, भारतीय किसान अधिकार आंदोलन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। किसी एक चेहरे के पीछे किसान लामबंद नहीं हो सके हैं। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष और किसान नेता अशोक बालियान का कहना है कि कई संगठन बनने से किसानों की एक जुटता कमजोर हुई है। किसान चाहता है कि केंद्र सरकार एसएमपी को लेकर ठोस निर्णय चाहता है।
किसानों की एकजुटता कम हुई
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में देश का किसान एकजुट था। कई आंदोलन कर किसानों का हक दिलवाया। अब किसानों के कई संगठन बनने से किसानों की एकजुटता कमजोर हुई है, जिसका असर भाकियू पर भी पड़ा है।
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