हालांकि सैन्य अफसरों का कहना है कि जिस स्तर पर कंचन सिंह की ड्यूटी रहती थी, उस स्तर पर वो सिग्नल रेजीमेंट के बारे में ज्यादा जानकारियां नहीं जुटा सकता था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सिग्नल कोर के बारे में जानकारी लेने के पीछे आखिर पीआईओ का क्या मकसद हो सकता है? इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद सिग्नल रेजीमेंट के आसपास सेना की चौकसी बढ़ा दी गई है।
खुफिया एजेंसियों का रहा दिनभर मूवमेंट
- आईबी और दूसरी खुफिया एजेंसियों ने सैन्य क्षेत्र में ली जानकारी
जासूसी के आरोप में पकड़े गए सेना के जवान कंचन सिंह के बारे में जानकारी जुटाने के लिए बुधवार को खुफिया एजेंसियों ने सैन्य क्षेत्र में डेरा डाले रखा। खुफिया एजेंसियों ने सेना के अफसरों से भी बात की लेकिन मेरठ सैन्य अफसरों ने इस बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। खुफिया एजेंसियां जवान के बारे में ये जानकारी भी जुटा रही हैं कि कहीं उसका मेरठ में किसी सिविलयन से तो संपर्क नहीं था। जवान की एक्टिविटी कहां-कहां पर थी। उसका रूटीन शिड्यूल क्या रहता था। इन सबके बारे में मिलिट्री इंटेलिजेंस काम कर रही है।
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