फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जुटाया जा रहा सिग्नल रेजीमेंट की लीक सूचनाओं का ब्यौरा

Wed, 17 Oct 2018 10:15 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन

सेना की खुफिया जानकारियां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी पीआईओ (पाकिस्तान इंटेलीजेंस ऑपरेटिव) को लीक करने के मामले में पकड़े गए सेना के जवान कंचन सिंह की सिग्नल रेजीमेंट में जड़े कहां तक फैली हुई हैं, कौन-कौन उसके नजदीकी थे? इसकी जानकारी के लिए सेना के अफसर लगातार उससे पूछताछ में जुटे हुए हैं। इस बात की तह तक जाने की कोशिश है कि कंचन ने पाआईओ को क्या सूचनाएं लीक की हैं? हालांकि इससे पहले पकड़े जा चुके आईएसआई एजेंटों  के पास से सैन्य क्षेत्रों के नक्शे बरामद हुए थे, लेकिन मेरठ में सेना के किसी जवान का पाकिस्तान के लिए जासूसी का यह पहला केस है। 

विज्ञापन


युद्ध के मैदान से हर पल की खबर सेना मुख्यालय तक पहुंचाने का काम सिग्नल रेजीमेंट का ही होता है। सिग्नल कोर के अंतर्गत बनाए गए तमाम रेजीमेंट सैन्य कम्यूनिकेशंस को बिना किसी रुकावट जारी रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सिर्फ युद्ध के दौरान ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं में भी राहत व बचाव कार्य के दौरान सिग्नल रेजीमेंट की अहम भूमिका होती है। उत्तराखंड के बागेश्वर का कंचन सिंह भी दो साल से इसी रेजीमेंट में तैनात था और व्हाट्सएप के जरिए पीआईओ को गोपनीय सूचनाएं लीक कर रहा था। उच्च स्तर पर सैन्य अफसर यह जानकारी एकत्र करने में लगे हैं कि कंचन ने अब तक कौन कौन सी जानकारियां भेजी हैं? इन सबकी तह तक जाने के लिए उसके व्हाट्सएप की डिटेल खंगाली जा रही है। क्योंकि समय समय पर इसका डेटा डिलीट किया जाता रहा है। 

जानकारी के मुताबिक सर्वोच्च प्राथमिकता पर व्हाट्सएप मुख्यालय से कंचन के चैट का सर्वर से ब्यौरा मांगा गया है। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञों से उसके मोबाइल से डिलीट किया गया डाटा भी रिकवर कराया जा रहा है। सेना इस मामले में कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती है, इसलिए उसने अभी तक इस मामले में पुलिस को शामिल नहीं किया है। सिग्नल रेजीमेंट के बारे में कौन सी जानकारी पीआईओ तक पहुंचने से क्या नुकसान हो सकता है? इस पर अलग से उच्च स्तरीय समीक्षा की जा रही है। लीक जानकारियों से पाकिस्तानी इंटेलिजेंस किस मंसूबे पर काम कर सकती है? इसका भी आंकलन हो रहा है। सैन्य अफसर और मिलिट्री इंटेलिजेंस हर बिंदु पर जुटे हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि सैन्य अफसरों का कहना है कि जिस स्तर पर कंचन सिंह की ड्यूटी रहती थी, उस स्तर पर वो सिग्नल रेजीमेंट के बारे में ज्यादा जानकारियां नहीं जुटा सकता था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सिग्नल कोर के बारे में जानकारी लेने के पीछे आखिर पीआईओ का क्या मकसद हो सकता है? इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद सिग्नल रेजीमेंट के आसपास सेना की चौकसी बढ़ा दी गई है। 
  
खुफिया एजेंसियों का रहा दिनभर मूवमेंट  
- आईबी और दूसरी खुफिया एजेंसियों ने सैन्य क्षेत्र में ली जानकारी  
जासूसी के आरोप में पकड़े गए सेना के जवान कंचन सिंह के बारे में जानकारी जुटाने के लिए बुधवार को खुफिया एजेंसियों ने सैन्य क्षेत्र में डेरा डाले रखा। खुफिया एजेंसियों ने सेना के अफसरों से भी बात की लेकिन मेरठ सैन्य अफसरों ने इस बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। खुफिया एजेंसियां जवान के बारे में ये जानकारी भी जुटा रही हैं कि कहीं उसका मेरठ में किसी सिविलयन से तो संपर्क नहीं था। जवान की एक्टिविटी कहां-कहां पर थी। उसका रूटीन शिड्यूल क्या रहता था। इन सबके बारे में मिलिट्री इंटेलिजेंस काम कर रही है।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें