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यूपी: 25 करोड़ की जमीन पर एमडीए का खेल, किसानों को ऐसे मिल रहा लाभ

Thu, 23 Aug 2018 02:23 PM IST
अमित मुदगल, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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मेरठ में एक तरफ जहां किसानों को भूखंड देने के लिए एमडीए जमीन न होने का रोना रो रहा है तो वहीं लगभग 13 हजार वर्ग मीटर जमीन ऐसी है जिस पर एमडीए ने कब्जा लेकर छोड़ दिया। अर्जित और अनार्जित जमीन की सीमा पर स्थित इस जमीन का मुआवजा तो एमडीए ने किसानों को दे दिया पर कब्जा आज तक लिया ही नहीं। 

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एमडीए की न तो इस जमीन पर कोई प्लानिंग है और न ही इसका कोई जिक्र। ऐेसे में इस जमीन पर लोगों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। गंगानगर की कालोनियों में लगातार खेल हुआ है। लैंड ऑडिट में भी इसका खुलासा हुआ था कि यहां निजी डेवलेपर्स को अधिक जमीन दे दी गई। यह सब सेटिंग से हुआ। यदि किसी बिल्डर ने एमडीए से पचास हजार वर्ग मीटर जमीन आवंटित कराई तो उसे गुपचुप तरीके से ज्यादा जमीन नाप दी गई। बिल्डर ने उसका कोई पैसा तक जमा नहीं किया।

करोड़ों के इस खेल के बाद एमडीए ने अब ऐसी ही एक और जमीन पर घोटाले की पटकथा तैयार कर दी है। गंगानगर में ही कसेरूबक्सर से सटी लगभग 13 हजार वर्ग मीटर जमीन ऐसी है, जिसे अधिग्रहीत कर एमडीए भूल गया है।

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बीच में फंस गई यह जमीन
वर्ष 1987 में एमडीए ने कसेरू बक्सर, अब्दुल्लापुर आदि गांवों की जमीन का अधिग्रहण कर गंगागनर बसाया। यह जमीन रजपुरा से सटी है और उस जमीन का अंतिम छोर है जिसे एमडीए ने अधिग्रहीत किया था। इसके लिए किसानों को लगभग चार करोड़ मुआवजा दिया जा चुका है। इसके बाद भी इस जमीन को एमडीए ने ऐसे ही छोड़ दिया। इस पर एमडीए की कोई प्लानिंग नहीं है।

20 हजार से ज्यादा का है रेट
जहां यह जमीन है वहां बाजार भाव बीस हजार प्रति वर्ग मीटर से ज्यादा का है। ऐसे में जमीन 25 करोड़ से ज्यादा की है। इस कारण बिल्डरों की भी निगाह है। चूंकि बिल्डर यहां पहले भी जमीन कब्जा चुके हैं ऐसे में बिल्डरों के लिए यह आसान टारगेट दिख रहा है।

किसानों को दिए जाने हैं भूखंड
एमडीए ने गंगानगर, वेदव्यासपुरी तथा लोहियानगर के किसानों के साथ समझौता किया है। किसानों को प्रतिकर के बदले भूखंड दिए जाने हैं। इसी के तहत जब सर्वे हुआ तो किसानों ने एमडीए अधिकारियों को यह जमीन दिखाई। इस पर एमडीए अधिकारी भौचक्के हैं। दस्तावेज में भी जमीन एमडीए की निकली। किसानों का कहना है कि उन्हें यहां भूखंड दे दिए जाएं। अन्यथा वह खुद कब्जा ले लेंगे।

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