जब वह घर वापस आया तो उसकी पुत्री व पत्नी के जेवर गायब थे। उसको प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि चिनाई मिस्त्री कुंदन उर्फ वीरेंद्र पुत्र दयानंद निवासी बसाईच घर आया था। उसने कुंदन पर अपनी नाबालिग पुत्री का अपहरण करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस द्वारा पीड़िता को बरामद कर मजिस्ट्रेट के समक्ष कराए बयान में दुष्कर्म का भी आरोप लगाया गया था।
इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामसुध सिंह की अदालत संख्या- 8 पोक्सो कोर्ट में हुई। विशेष सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पुष्पेंद्र मलिक ने कोर्ट में पांच गवाह पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त कुंदन उर्फ वीरेंद्र को किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने का दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कुमार पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और इस राशि को पीड़िता को दिए जाने का आदेश भी दिया।
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