भाजपा के प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया
गुर्जर बिरादरी के अशोक कटारिया को एमएलसी बनाकर भाजपा ने पश्चिमी क्षेत्र में गुर्जर मतों को साधने के लिए बेहतर कार्ड खेला है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि एमएलसी चुनाव के बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह मिल सकती है। अशोक कटारिया का एमएलसी बनना दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर के लिए झटका माना जा रहा है। क्योंकि डॉ. सोमेंद्र गुर्जर प्रतिनिधित्व के तहत मंत्री पद की दावेदारी पेश कर रहे हैं। लेकिन अशोक कटारिया के कद के आगे अब उनकी पैरवी कमजोर पड़ सकती है।
डॉ. वाजपेयी की फिर हुई उपेक्षा
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी अब पार्टी में लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। वर्ष 2014 में उनके ही नेतृत्व में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 72 सीटें जीतकर इतिहास रचा था। लेकिन इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से हुई अदावत के चलते पैदा हुई गुटबाजी से उन्हें किनारे करना शुरू कर दिया। विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद पर नहीं दोहराया गया। शहर विधानसभा से वह चुनाव लड़े। लेकिन हार गए। इसके बाद उम्मीद थी कि एमएलसी या राज्यसभा में उन्हें भेजा जाएगा। वहीं राष्ट्रीय संगठन में भी किसी अहम दायित्व देने के कयास पार्टी के तमाम पुराने नेता लगा रहे थे। लेकिन डॉ. वाजपेयी को अभी तक पूरी तरह उपेक्षित रखा गया है।
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