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यूपी: इस शहर में धड़ल्ले से बन रहीं फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां, ऐसे शिकार ढूंढते हैं शिक्षा माफिया

Tue, 15 Jan 2019 05:41 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मेरठ
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यूपी के मेरठ शहर में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का बड़ा रैकेट काम कर रहा है। ये बीबीए, बीसीए, एलएलबी ही नहीं बीएड और एमएड तक की मार्कशीट-डिग्री पैसे लेकर मुहैया करा रहे हैं। मेडिकल पुलिस ने इस रैकेट के सदस्यों को पकड़कर कई मार्कशीट बरामद की हैं। सोमवार को मेडिकल पुलिस ने पांच मार्कशीट का वेरीफिकेशन कराया तो सभी फर्जी निकलीं। ऐसे में साफ हो गया है कि जुलाई में एसटीएफ द्वारा पकड़े गए गैंग के बाद भी कुछ शिक्षा माफिया इस खेल में जुटे हैं। 

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शहर में सीसीएसयू समेत कई विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट, डिग्री, सार्टिफिकेट और डिप्लोमा बनाए जाने का गोरखधंधा चल रहा है। यहां से प्रदेश में ही नहीं बल्कि उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तक में इनकी सप्लाई की जा रही है। सीसीएसयू के नाम से बन रही फर्जी डिग्री का मामला बीते साल उस समय सुर्खियों में आया था, जब पंजाब पुलिस ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर की डिग्री पर सवाल उठाए थे। 

हरमनप्रीत की डिग्री सीसीएसयू के नाम पर बनी थी। पुलिस ने मामले की जांच कराई तो सीसीएसयू में उनकी डिग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला था। वहीं बीते साल जुलाई में मेरठ एसटीएफ ने फर्जी मार्कशीट बनाने वाले एक बड़े गैंग का भंडाफोड़ किया था। आरोपियों के पास से 12 से ज्यादा कॉलेजों-विश्वविद्यालयों की डिग्री और मार्कशीट बरामद हुईं थीं। एसटीएफ ने कई आरोपियों को जेल भेजा था। 

पांच डिग्री-मार्कशीट निकलीं फर्जी 
सोमवार को फर्जी डिग्री-मार्कशील बनाने वाले ऐसे ही रैकेट के सदस्य मेडिकल पुलिस ने दबोचे। इसके बाद बीएड, एमएड और तीन अन्य विषयों की मार्कशीट और डिग्रियां पकड़ी गईं। पुलिस ने गोपनीय तरीके से इनकी जांच कराई तो सभी फर्जी मिलीं। इनका सीसीएसयू में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद मेडिकल पुलिस ने कई जगहों पर छापामारी की है। इस रैकेट में सीसीएसयू और कॉलेजों के कई कर्मचारियों के जुड़े होने की आशंका है। 
ऐसे धोखेबाजों से रहें सतर्क
महज 10 से 20 हजार रुपये में शिक्षा माफिया युवाओं को शिकार बनाते हैं। जो युवा फेल हो जाते हैं या फिर जो पढ़ ही नहीं पाते हैं। इसके अलावा शॉर्ट कट के चक्कर में भी कई इन माफियाओं का शिकार बनते हैं। शिक्षा माफिया युवाओं को बताते हैं कि वे ओरिजनल मार्कशीट दे रहे हैं, लेकिन असल में उनका कहीं रिकॉर्ड नहीं रहता है। जांच में फर्जी मार्कशीट पकड़ी जाती हैं। युवाओं को ऐसे धोखेबाजों से सतर्क रहने की जरूरत है। 
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पुलिस करती है लापरवाही 
पुलिस ऐसे मामलों में लापरवाही करती है। इसके चलते शिक्षा माफिया धड़ल्ले से रैकेट चला रहे हैं। मेरठ में इससे पहले कई मामले हुए, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। पिछले साल सीसीएसयू में एमबीबीएस का पेपर लीक हुआ था। एसटीएफ ने यहां कॉपियां बदलने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। लेकिन इन मामलों में पुलिस ने जांच आगे नहीं बढ़ाई। पूरी जांच होती तो बड़े खुलासे होते। 

आरोपी किए जाएंगे बेनकाब
पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए काम किया जा रहा है। आरोपियों को बेनकाब कर जेल भेजा जाएगा। एसटीएफ की कार्रवाई को छोड़ दें तो मार्कशीट और डिग्री के खेल में पुलिस की यह बड़ी कार्रवाई है। -सतीश कुमार, एसओ मेडिकल

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