बुधवार को नगीना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला को उसका पति डिलीवरी कराने के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचा। आरोप है कि वहां के चिकित्सकों ने महिला को भर्ती करने से मना कर दिया। इससे परिजन परेशान हो गए। परिजनों के मुताबिक उनके पुत्र ने करीब दो वर्ष पूर्व ही मुंबई की एक युवती से प्रेम विवाह किया था। प्रेग्नेंसी जांच कराने पर पता चला कि महिला एचआईवी पॉजिटिव है। तभी से महिला का इलाज जिला महिला चिकित्सालय का चल रहा है।
महिला के पति के मुताबिक वह मुंबई में रहकर मजदूरी करता था। उसने वहां की युवती से शादी की थी। शादी के बाद ही उसे पता चला था कि पत्नी एचआईवी पॉजिटिव है, जबकि युवक निगेटिव है। वह चाहता है कि कम से कम आने वाली संतान एचआईवी पॉजिटिव पैदा न हो। इसी बात को ध्यान में रखते हुए वह पत्नी को जिला महिला अस्पताल में डिलीवरी कराने के लिए लाया था, लेकिन वहां के चिकित्सकों ने उसकी मंशा पर पानी फेर दिया।
चिकित्सकों का कहना है कि अन्य मरीजों में संक्रमण न फैले इसी को ध्यान में रखते हुए महिला को रेफर किया गया है। जिला अस्पताल में एक ही ओटी है,जबकि मेडिकल कॉलेज में चार ऑपरेशन थिएटर हैं। एचआईवी सीजर के लिए एक अलग से सेपरेट ओटी है। वहां अच्छे से इसका ऑपरेशन हो सकता है। ऐसे सीजर करने के बाद कम से कम 72 घंटे तक ओटी को बंद रखकर उसकी सफाई आदि कराई जाती है। ऐसा करने से कम से कम 30 मरीज प्रभावित होंगे। प्रतिदिन यहां 10 सीजर किए जाते हैं।
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