रोहटा कस्बे के डूंगर गांव में दशकों से संचालित चर्म शोधन कारखाने से फैल रहे प्रदूषण के मामले में एनजीटी के आदेशों के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। एनजीटी द्वारा हाल में की गई सुनवाई में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने और प्रमुख सचिव को जांच के निर्देश दिए जाने के बाद प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। प्रशासन ने कारखाने को खाली करने के लिए दो दिन का समय दिया है। सोमवार को सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
अपर नगर मजिस्ट्रेट बृजेश सिंह और एसडीएम सदर दीक्षा जोशी तहसील टीम के साथ दोपहर डूंगर गांव पहुंचे और कारखाने की स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें आगामी कार्रवाई की जानकारी दी। गांव में लंबे समय से संचालित इस चर्म शोधन कारखाने को लेकर वर्षों से प्रदूषण की शिकायतें सामने आती रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कारखाने से निकलने वाले प्रदूषित पानी और दुर्गंध के कारण आसपास के क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। आसपास के गांवों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर भी ग्रामीण चिंता जताते रहे हैं।
इस मामले में पूर्व में एनजीटी द्वारा वर्ष 2013 में कारखाने को बंद करने के आदेश दिए गए थे। इसके बावजूद कार्रवाई न होने पर हाल ही में पुनः सुनवाई के दौरान एनजीटी ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। प्रशासनिक टीम ने निरीक्षण के बाद कारखाने में कार्यरत ग्रामीणों के साथ बैठक कर स्थिति से अवगत कराया।
टीम में नायब तहसीलदार आदेश कुमार, लेखपाल विनीत कुमार, ग्राम पंचायत सचिव केपी सिंह, थाना प्रभारी रोहटा पूजा पंवार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। एसडीएम सदर दीक्षा जोशी ने बताया कि सोमवार को प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर कारखाने को सील करने की कार्रवाई करेगी।
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