वर्ष 2019 में नई मंडी, गांधी कॉलोनी, द्वारिकापुरी, पटेलनगर, आदर्श कॉलोनी, साकेत, लाला दीपचंद कॉलोनी और शिवपुरी जैसी कॉलोनियों को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था। इस निर्णय के बाद से इन क्षेत्रों में संपत्तियों की खरीद-बिक्री और बैंक ऋण पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। लगभग 570 बीघा भूमि से जुड़ा यह विवाद सात वर्षों से जारी है। मीनाक्षी स्वरुप ने बताया कि इससे हजारों परिवारों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 1950 में न्यायालय के आदेश के बाद लाला दीपचंद को इसका वैध स्वामित्व प्राप्त हुआ था। इसके बाद यहां विधिवत रूप से कॉलोनियों का विकास हुआ। वर्ष 2017 में प्रशासन ने भूमि को शत्रु संपत्ति प्रतीत होने का नोटिस जारी किया, और वर्ष 2019 में एक शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई, जिसके बाद प्रतिबंध लगा दिया गया। मीनाक्षी स्वरुप ने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच के साथ-साथ अंतिम निर्णय होने तक संपत्ति के क्रय-विक्रय पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने की मांग की है।