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यूपी: प्रमुख सचिव ने माना, थानों में नहीं होती सुनवाई, ड्यूटी पर भी सोशल मीडिया पर व्यस्त पुलिसकर्मी

Sun, 02 Dec 2018 03:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज
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उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार का मानना है कि प्रदेश के थानों, ब्लॉक और तहसीलों में सुनवाई नहीं होती। जनता में पुलिस के प्रति नजरिया ठीक नहीं है। आम आदमी यही सोचता है कि थानों में पीड़ितों को दो-दो घंटे बिना वजह बिठाया जाता है। महिलाएं हो या वृद्ध थानों में उस तरह की सुनवाई नहीं होती, जिस तरीके से होनी चाहिए। घायल कराहते हैं फिर भी उन्हें टरकाने की कोशिश की जाती है। पुलिस का यही नजरिया हमें बदलना है।
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पुलिस लाइन सभागार में प्रमुख सचिव (गृह) ने ट्रेनिंग कर रहे पुरुष और महिला आरक्षियों से सीधी बात की। इस दौरान पुलिस लाइन, पीटीएस, छठी वाहिनी पीएसी और 44 वीं वाहिनी पीएसी में ट्रेनिंग करने वाले 400 प्रशिक्षु आरक्षी मौजूद रहे। इस दौरान डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी अखिलेश कुमार सहित अन्य अफसर भी मौजूद रहे।

प्रमुख सचिव ने पुलिस के प्रति जनता का नजरिया जानना चाहा। प्रशिक्षु आरक्षियों ने भी कहा कि पुलिस में ही अलग-अलग अंतर है। प्रमुख सचिव ने कहा कि जनता यह सोचती है कि पुलिस, डॉक्टर और वकीलों के पास जाकर जेब खाली होती है। पुलिस विभाग में और भी बेहतर करने की जरूरत है। ट्रेेनिंग करने वाले सिपाही ही बड़ा बदलाव ला सकते हैं। छात्र, आम आदमी, चौकीदार और वृद्धों से ऐसा रिश्ता बनाएं जो भावनाओं से जुड़ा हो।
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उन्होंने कहा कि देखने में सामने आता है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर व्यस्त हैं, यह गलत है। सोशल मीडिया का इतना इस्तेमाल करें जो पुलिसिंग को बेहतर और मजबूत बनाएं। प्रमुख सचिव ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार में पुलिस में सबसे ज्यादा प्रमोशन हुए हैं।

एक साल में एक लाख सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश को अगले माह जनवरी में 42 हजार सिपाही भी मिल जाएंगे। स्टाफ अधिक होने से पुलिस का तनाव कम होता है। उन्होंने कहा कि दरोगा और इंस्पेक्टर के सरकार ने बहुत प्रमोशन किए हैं। प्रदेश में अपराध का ग्राफ गिरा है। कई अपराधी जेलों में पहुंचाए गए हैं।
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मेरठ न्यूज
प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार जब प्रशिक्षु आरक्षियों से सीधी बात कर रहे थे तो वह बार-बार यही पूछे रहे थे कि आपको बाहर से पुलिस कैसी लगती है और अब आप पुलिस में ट्रेनिंग कर रहे हैं तो कैसी लग रही है। इस पर गौतमबुद्धनगर की एक महिला प्रशिक्षु ने पूछ लिया कि सर! हम नोएडा जैसे शहर में जाते हैं तो वहां पुलिस का रिस्पांस अच्छा है।

सड़क पर पुलिस दिखती है। लेकिन जब हाथरस में जाते हैं तो दूर तक पुलिस नहीं दिखाई देती। सूचना के बाद भी पास से निकल जाती है, रुकती नहीं। इस पर प्रमुख सचिव ने कहा कि विभाग में बड़े बदलाव की जरूरत है। गांव और शहर की पुलिस में अभी अंतर है, इसी अंतर को हमें खत्म करना है। प्रमुख सचिव ने कहा कि यूपी 100 का रिस्पांस टाइम पहले 22 मिनट का था, लेकिन इसमें सुधार करके 12 मिनट तक आ चुका है। नई बैरक भी बनाई जा रहीं हैं। 

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