माध्यमिक शिक्षा परिषद अपना सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन करने में जुटा है, ताकि वेरीफिकेशन से लेकर तमाम कामों को आसानी से सुलझाया जा सके। इसके साथ ही बाकी सारे कामों को भी डिजिटल करने की तैयारी है। इसके लिए छात्रों का पंजीकरण शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किए जाने का सुझाव दिया गया है, जिसके जरिये बोर्ड अपने पूरे सिस्टम को अपग्रेड करने के साथ ही खर्चों को भी पाट सकेगा।
परिषद ने पंजीकरण शुल्क बढ़ाने के साथ ही उसको तीन हिस्सों में बांटे जाने का भी प्रस्ताव दिया है, ताकि क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर मुख्यालय तक के खर्चों को पूरा किया जा सके। बैठक में शामिल हुए मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय के उप सचिव मनोज कुमार ने कहा है कि अगर 50 रुपये शुल्क के तौर पर बोर्ड को मिलते हैं तो उन्हें तीन स्तर पर वितरित किया जाएगा। जिसमें बोर्ड और सरकार की हिस्सेदारी 20-20 रुपये की होगी।
जबकि दस रुपये कॉलेज लेवल पर ही रहेंगे। मनोज कुमार का कहना है कि अगर अतिरिक्त पैसा पंजीकरण के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यालय को मिलता है तो काफी काम अपग्रेड हो जाएगा। क्योंकि बोर्ड के खर्च बढ़ रहे हैं और उनको पूरा करने के लिए उतना बजट नहीं मिलता। उधर, शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए बोर्ड ने योग्य लेखकों की किताबों और गाइडों को कोर्स में शामिल करने का भी सुझाव दिया है।
बढ़ते खर्चों की भरपाई करना मुश्किल
लंबे समय से बोर्ड के सामने आर्थिक संकट है, जिसको लेकर काफी दफा शासन को प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। क्योंकि मेंटिनेंस से लेकर कोर्ट केस, डाक्यूमेंट वेरीफिकेशन के काम में काफी पैसा खर्च होता है। इसी बीच सारे रिकार्ड का डिजीटलाइजेशन भी होना है।
पुराना रिकार्ड भी होगा ऑनलाइन
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सामने सबसे बड़ा काम वेरीफिकेशन का भी है, जिसे कम करने के लिए बोर्ड सारे रिकॉर्ड को डिजीटलाइजेशन के बाद ऑनलाइन करना चाहता है, हालांकि 2003 के बाद का रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध है, लेकिन भौतिक सत्यापन के लिए काफी कागजात बोर्ड के चारों क्षेत्रीय कार्यालयों में आते हैं।