यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल पर तो काफी हद तक नकेल कस गई है, लेकिन अब नया खेल सामने आया है। यह खेल है विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र और आधार कार्ड में उम्र का फर्क। दो स्कूलों के हाईस्कूल के विद्यार्थियों की जांच शुरू हो गई है, जबकि और भी कई स्कूल रडार पर आ गए हैं। डीआईओएस ने स्टूडेंट्स की उम्र में संदेह होने पर उनकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
वॉइस रिकॉर्डिंग वाले सीसीटीवी कैमरे, राउटर लगाकर ऑनलाइन मॉनिटरिंग और सचल दलों से लगातार निगरानी के कारण नकल तो काफी हद तक रुक गई है। इसके अलावा गलत प्रपत्रों के आधार पर परीक्षा देने की कोशिश करने वालों के भी हर साल फॉर्म डिलीट किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले 17 जिलों के पिछले तीन साल में 20 हजार से ज्यादा फॉर्म डिलीट किए गए हैं। नाम बदलकर सेल्फ सेंटर पर एग्जाम देने का खेल भी काफी हद तक रुका है, लेकिन उम्र कम करने के चक्कर में यह फर्जीवाड़ा शुरू हो गया है, जिसने माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में हड़कंप मचा दिया है।
अब ऐसे विद्यार्थियों पर खास निगाह रहेगी, जो देखने में ज्यादा उम्र के लग रहे हैं, मगर उन्होंने प्रवेश पत्र में कम उम्र लिवखाई हुई है।