प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील
कृषि मंत्री ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए गोबर की खाद, कम्पोस्ट और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि एक जून से 30 जून तक प्रदेशभर में प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत लगभग एक हजार स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे।
खाद की कोई कमी नहीं, पर्याप्त भंडार उपलब्ध
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में 29.53 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है। किसानों को खाद की कमी को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सभी किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के उपयोग की भी अपील की।
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गन्ना किसानों को मिली राहत
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष गन्ने के मूल्य में लगभग 40 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिला है और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिली है।
कृषि शिक्षा और अनुसंधान को मिल रहा बढ़ावा
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सरकार ने अपने कार्यकाल में चार नए कृषि महाविद्यालयों को मंजूरी दी है। कृषि विश्वविद्यालयों को 372 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। कृषि अनुसंधान, पशु चिकित्सा, महिला प्रशिक्षण, उन्नत खेती तकनीक, सिंचाई प्रबंधन और फसल गुणवत्ता सुधार पर विशेष कार्य किया जा रहा है।
महिलाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से सहफसली खेती को अपनाने और गन्ने के साथ मूंगफली तथा अन्य फसलों की खेती बढ़ाने की अपील की। साथ ही दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए अरहर जैसी फसलों का रकबा बढ़ाने का भी आह्वान किया। प्रेस वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अधिकारी भी मौजूद रहे।