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जमानत पर रिहा जरायम के खिलाड़ी बने पुलिस के लिए चुनौती, इनके इशारों पर कर रहे क्राइम

Mon, 24 Sep 2018 10:52 AM IST
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
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जेल से छूटे जरायम के खिलाड़ी मेरठ पुलिस के लिए फिर से चुनौती बन रहे हैं। मेरठ जिले में करीब छह माह में 120 अपराधी जमानत पर छूटे हैं। कोई बड़ी आपराधिक घटना होने पर इनमें से ही खास चेहरों का रिकॉर्ड खंगाला जाता है। इनमें भी करीब 75 प्रतिशत अपराधी लापता हो गए तो कई बदमाशों ने अपना नाम पता और ठिकाना बदल लिया। जेल में बंद कई बदमाश अपने गुर्गों से गैंगवार या रंजिश में हत्या करा रहे हैं। मुखबिर तंत्र भी अब भरोसेमंद नहीं रह गया है। कोई बड़ी घटना होने पर पुलिस बदमाशों के रिकॉर्ड, खास क्लू, सर्विलांस या सीसीटीवी कैमरों के भरोसे रहती है।
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वारदात हुई तो आए याद

शहर में कोई बड़ी वारदात होने पर पुलिस को जेल से जमानत पर छूटे बदमाश अनीस, नौशाद, इरशाद, इरशाद उर्फ काला, शाहिद उर्फ कबूतर, शाहिद उर्फ लंगड़ा, जावेद उर्फ कचरा, हसनैन, मांगे उर्फ श्यामू, वसीम उर्फ सोबी, योगेंद्र उर्फ डब्बू, शब्बीर, कलीम, नौसी, विनोद जैसे करीब 120 अपराधी याद आते हैं। इन बदमाशों के मोबाइल नंबर व फोटो पुलिस के पास हैं। लेकिन इसके बावजूद ये बदमाश घटनाएं कर रहे हैं। खास बात यह है कि इनके से कई बदमाश अपनी पहचान और ठिकाने बदल चुके हैं। जिसके चलते यह कानून के हाथ से दूर हैं।

और दूसरा फरार हो जाता है
जमानत पर बाहर आए शातिर अपराधी ही पुलिस के टारगेट पर होते हैं। जब भी कोई मुठभेड़ होती है तो एक बदमाश के पैर में पुलिस की गोली लगती है और उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो जाता है। ये फरार बदमाश कौन होता है, इसकी पुलिस को नहीं होती। लेकिन शातिर अपराधी को पुलिस मुठभेड़ में नामजद कर लेती है, ताकि उस पर शिकंजा कसा जा सके।

मुखबिरों पर भी संकट मंडराया 

पुलिस के मुखबिर कौन-कौन हैं, इसका पता भी बदमाशों को है। जेल से छूटते ही कई बदमाश मुखबिरों को चेतावनी देते हैं कि यदि उसकी कोई सूचना पुलिस तक पहुंचाई तो अंजाम ठीक नहीं होगा। ऐसे में अधिकांश मुखबिर बदमाशों से दूरी बनाकर रखते हैं। कई मुखबिर तो बदमाशों ने सिर्फ इसलिए मारे क्योंकि वह पुलिस के संपर्क में माने गए। ऐसे में पुलिस का यह सूचना तंत्र अब ज्यादा भरोसेमंद नहीं रहा है।

डकैती होते ही खंगाला था रिकॉर्ड 
मोहनपुरी में सीओ सिविल लाइन ऑफिस के सामने दो घरों में डकैती हुई थी। जिसमें पुलिस ने जेल से छूटे अपराधियों का रिकॉर्ड खंगाला। उनके फोटो का मिलान भी कराया। एक बदमाश शानू की पहचान हुई। उसके जरिये पूरा गैंग पकड़ा गया। जानी के बाफर गांव में जितेंद्र की हत्या में भी ऐसा खेल हुआ। जेल में बंद शातिर ने प्लानिंग करके शूटरों को एक लाख में हायर किया और फिर हत्या करा दी। खरखौदा के उलधन गांव में शातिर बदमाशों ने जेल से छूटते ही वारदात की। हस्तिनापुर के अलीपुर मोरना में हाल ही में हुए हत्याकांड की पटकथा भी जेल से रची गई थी।
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नोएडा की घटना में शातिर बदमाश 

नोएडा में बैंक लूटने आए बदमाशों ने दो सिक्योरिटी गार्डों की गोली मारकर हत्या कर दी। बदमाश बैंक नहीं लूट पाए। लेकिन बड़ी वारदात कर गए। यह मामला लखनऊ तक गूंजा हुआ है। इस घटना में शामिल शातिर बदमाशों की पहचान के लिए मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर समेत कई जनपदों से पुराने बदमाशों व जेल से छूटे बदमाशों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। एडीजी मेरठ प्रशांत कुमार ने जोन के जनपदों के कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि इस घटना में कोई क्लू मिले तो तुरंत शेयर करें। 

बदमाशों की हर गतिविधि रहे पता
जेल से छूटे अपराधियों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। क्राइम मीटिंग में थानेदारों को निर्देश दिए हैं कि अपराधियों की हर गतिविधि पुलिस को पता होनी चाहिए। थाने में हाजिरी रजिस्टर होता है, जो अपराधी जेल से छूटकर लापता हो जाता है, उसकी खोजबीन कर उचित कार्यवाही की जाए। 
-अखिलेश कुमार, एसएसपी 

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