बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के बाद हरकत में आई यूपी एटीएस ने मंगलवार को नगर के अलग-अलग स्थानों पर छापे मारे। टीम ने बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह के दो लोगों को हिरासत में लिया है। बताया जाता है कि ये लोग फर्जी पासपोर्ट बनाने के धंधे में लिप्त हैं। एटीएस ने यह कार्रवाई एसटीएफ और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर की। टीम ने एक स्थान से कंप्यूटर, लैपटॉप और प्रिंटर सहित अन्य सामान भी जब्त किया है।
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बता दें कि देवबंद में फर्जी पासपोर्ट बनाने का गोरखधंधा पिछले कई वर्षों से चल रहा है। खुफिया विभाग और पुलिस द्वारा फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। करीब एक वर्ष पूर्व कुटेसरा से बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला के गिरफ्तार होने के बाद देवबंद में फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के गोरखधंधे का खुलासा हुआ था। इसके बाद से यूपी एटीएस इस गिरोह के सदस्यों को गिरफ्त में लेने की फिराक में लगी थी। मंगलवार को एटीएस ने एसटीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ नगर के मोहल्ला पठानपुरा और खानकाह में पुलिस चौकी के सामने स्थित एक सेंटर पर छापेमारी कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें पठानपुरा निवासी अहसान अहमद, मोहल्ला किला निवासी वसीम अहमद व एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। बताया जाता है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से कंप्यूटर, लैपटॉप, स्केनर, प्रिंटर व कुछ कागजात बरामद किए हैं। सूत्र बताते हैं कि एटीएस को पता चला था कि जहीर खान नाम से एक पासपोर्ट बनाया गया था। इसमें पता मकान नंबर 1500 मोहल्ला पठानपुरा दिया गया था। जब जांच की गई तो इस नाम का कोई व्यक्ति वहां मिला ही नहीं। इसके बाद से ही एटीएस इस गोरखधंधे से जुड़े लोगों की जांच में लगी हुई थी। एटीएस गिरफ्त में आए तीनों लोगों को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ ले जाने की तैयारी कर रही है। साथ ही खानकाह पुलिस चौकी के सामने चल रहे इस गोरखधंधे में कुछ पुलिसकर्मियों की संलिप्ता की आशंका जताई जा रही है। इसलिए एटीएस ने इस दिशा में भी जांच करनी शुरु कर दी है।
ठेके पर बनवाए जाते हैं पासपोर्ट
देवबंद में तमाम खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर रहती है। लेकिन इसके बावजूद यहां फर्जी पासपोर्ट का धंधा हैरत में डालने वाला है। दरअसल, यहां ठेके पर पासपोर्ट बनवाने का काम काफी समय से चल रहा है। पासपोर्ट कार्यालय से लेकर स्थानीय जांच प्रक्रिया पूरी कराने तक के लिए एजेंट ठेका लेते हैं। पासपोर्ट बनवाने वाले आवेदक का भौतिक सत्यापन तक नहीं किया जाता है। इसी का लाभ उठाकर संदिग्ध लोग भी आसानी से पासपोर्ट बनवा लेते हैं।
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