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UP: विदेश में बंधक बनाकर यातनाए…! पांच महीने बाद लौटा विकास, बोला-'जीने की उम्मीद भी टूट चुकी थी'

Sat, 22 Nov 2025 11:28 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

कंबोडिया में नौकरी दिलाने के नाम पर बंधक बनाए गए बागपत के युवक विकास राणा को पांच माह बाद भारतीय दूतावास की मदद से मुक्त कराया गया। घर लौटकर युवक ने बताया कि कैसे कमीशन के लालच में एजेंट युवकों को विदेश भेजकर फंसा देते हैं। अब पीड़ित ने ऐसे एजेंटों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बागपत जनपद में धनौरा सिल्वरनगर गांव निवासी विकास राणा जुलाई में अपने रिश्तेदार अमित के साथ विदेश में नौकरी की उम्मीद में घर से निकले थे। उन्हें बताया गया था कि दोनों थाईलैंड में काम करने जा रहे हैं, लेकिन यात्रा के दस दिन बाद ही सच्चाई सामने आने लगी।

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पासपोर्ट छीनकर बना लिया बंधक
दस दिन बाद विकास ने घर फोन किया और बताया कि कंपनी उन्हें कंबोडिया ले आई है। कुछ ही सप्ताह बाद 14 अक्टूबर को वह रोते हुए फोन पर बोल रहे थे कि पासपोर्ट छीन लिए गए हैं और लगातार यातनाएं दी जा रही हैं। परिवार घबरा गया और एसपी को लिखित शिकायत दी।

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शासन-प्रशासन की कार्रवाई से मिली जिंदगी
एसपी सूरज कुमार राय ने मामला साइबर क्राइम मुख्यालय लखनऊ को भेजा। वहां से पत्र इंडियन साइबर क्राइम कमांड सेंटर पहुंचा। विदेश मंत्रालय तक बात पहुंची और फिर कंबोडिया में भारतीय दूतावास ने स्थानीय प्रशासन की मदद से विकास को मुक्त कराया।

दिल्ली एयरपोर्ट से घर-पांच महीनों बाद मुस्कान लौटी
मुक्त होने के बाद विकास राणा दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे और शुक्रवार दोपहर अपने गांव पहुंचे। परिवार ने पांच महीने बाद अपने बेटे को देखकर राहत की सांस ली।

 
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मेरी तरह कोई और न फंसे-विकास राणा
घर लौटकर विकास ने कहा-'कमीशन के लालच में एजेंट यहां से युवकों को नौकरी के बहाने विदेश भेजते हैं और वहां बंधक बना देते हैं। मैंने जो झेला, वह कोई और न झेले।'
उन्होंने बताया कि उनके साथ नौ और युवक भारत लाए गए हैं, जो अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं।

एजेंटों पर कार्रवाई की मांग
विकास ने प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे एजेंटों को पहचाना जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि कोई और युवक झांसे में न आए।
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