Meerut News: मेरठ जिले में 255 पुरुष और 224 महिलाएं ग्राम प्रधान हैं। 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। सोमवार को यूपी सरकार ने उन्हें प्रशासक बनाने का फैसला ले लिया। प्रधानों ने इसे सराहनीय कदम बताया।
पंचायत चुनाव होने तक ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले से प्रधानों में खुशी है। जिले में 12 ब्लॉक हैं, जिनमें 479 प्रधान हैं। इनमें 255 पुरुष और 224 महिला प्रधान हैं। अनुसूचित जाति की महिला प्रधान 38 हैं, जबकि पिछड़ा वर्ग की 47 महिला प्रधान हैं। आरक्षित महिला सीट पर 76 प्रधान हैं। इनके अलावा 63 अन्य सामान्य ग्राम पंचायतों पर भी महिलाएं जीतीं थीं।
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26 मई को गांव के प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इससे पहले ही सोमवार को यूपी सरकार ने यह निर्णय लिया है। ग्राम प्रधानों ने सरकार के इस कदम को सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि इस निर्णय से ग्राम पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। किशोरपुर की ग्राम प्रधान रीतू चौधरी का कहना है कि अगर किसी अधिकारी को प्रशासक बनाया जाता है तो वह अकेले इतनी ग्राम पंचायतों को कैसे देखते। इस कदम से ग्राम पंचायतों का पूरा विकास होगा।
जलालपुर जोरा के ग्राम प्रधान व राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के मंडल सचिव महेंद्र सिंह ने कहा कि इससे पंचायतों का विकास कार्य पहले की भांति चलता रहेगा। भैंसा की ग्राम प्रधान उमेश चौधरी का कहना है कि किसी अधिकारी के प्रशासक नियुक्त होने से गांव वालों को भी परेशानी होती है। तोफापुर के प्रधान व राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के जिला प्रभारी अजय सागर ने कहा कि पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन की यह मांग पूरी करने पर मुख्यमंत्री का आभार है।
भामौरी के ग्राम प्रधान ठाकुर दिनेश ने कहा कि चुनाव में देरी के चलते अगर पंचायतों की जिम्मेदारी सीधे अधिकारियों के पास चली जाती तो गांवों के छोटे-छोटे जरूरी कार्य प्रभावित हो जाते। अटेरना ग्राम प्रधान चंचल सोम ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान ग्राम प्रधान ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं क्योंकि वह सीधे जनता के बीच रहते हैं। इस निर्णय से गांवों में सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं पर असर नहीं पड़ेगा।
सरधना देहात व अहमदाबाद की ग्राम प्रधान कोमल कहा कि पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों और सरकारी योजनाओं को गति मिलेगी। गांवों में विकास की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था।
कैली ग्राम प्रधान हाजी तौहीद ने कहा कि सरकार ने जनभावनाओं को समझते हुए यह निर्णय लिया है। प्रधान संगठनों की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही थी कि पंचायत चुनाव तक वर्तमान प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी जाए। प्रधानों ने उम्मीद जताई कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।