मेरठ से केदारनाथ दर्शन के लिए गए लगभग 40 श्रद्धालु बादल फटने के कारण फंस गए हैं। कई लोग इस त्रासदी में बाल-बाल बच गए हैं। जबकि कुछ लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे उनके परिजन चिंतित हो गए हैं। वह अपनों के सकुशल होने की प्रार्थना कर रहे हैं और उनसे संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं।
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बताया कि उनके प्रभात नगर निवासी यश गुप्ता और मेरठ नमकीन बुढ़ाना गेट संचालक उनके रिश्तेदारों के बच्चों के साथ छह लोग केदारनाथ गए थे। कल से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था। गुरुवार को उन्होंने बताया कि उनके 50 मीटर दूरी बादल फटा और पूरा रास्ता ब्लॉक हो गया। ऐसे में नेटवर्क भी जाम हो गए। जिसके चलते परिवार से संपर्क नहीं हो पाया।
शहर के जयदेवी नगर निवासी राकेश का पुत्र तरुण, भांजा अंकित, पड़ोस में रहने वाले जॉनी व अज्जू के साथ केदारनाथ गए थे। बुधवार रात राकेश के बेटे तरुण से फोन पर बात हुई थी। तब तक सब ठीक-ठाक था। तरुण ने पिता को बताया था कि वह गुरुवार को दर्शन करने के बाद लौटेंगे। सुबह टीवी पर बादल फटने खबर देखने के बाद उन्होंने फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया तो तरुण व अन्य के मोबाइल स्विच ऑफ थे।
इससे परिजन परेशान हो गए। ब्रह्मपुरी के मोनू शर्मा और रिठानी के तनुज शर्मा भी केदारनाथ में फंसे हैं। उन्होंने परिजन को बताया कि अचानक से बादल फटने से सारे रास्ते बंद हो गए। रास्ता खुलने पर वह वापस घर के लिए रवाना होंगे। केदारनाथ से बाइक पर लौट रहे दिल्ली चुंगी निवासी मनोज शर्मा और उनकी पत्नी अदिति शर्मा तीनधारा में ऊपर से गिरे पत्थर से टकरा गए। जिससे उनकी बाइक गिर गई। अदिति सड़क पर और मनोज शर्मा खाई की ओर जा गिरे।
गढ़वाल मंडलायुक्त की ड्यूटी से लौट रहे बछेलीखाल चौकी के सिपाही राजेश और भूपेंद्र ने अपने वाहन में मौजूद रस्सी के सहारे खाई में उतर कर मनोज का बचाया। इसके अलावा माधवपुरम के अमित बंसल, पुनीत बंसल और मयंक बंसल केदारनाथ का दर्शन कर चढ़ाई से उतर रहे थे। बादल फटने के बाद से परिवार के लोगों की बेचैनी बढ़ गई। परिजन का कहना है कि मोबाइल स्विच ऑफ होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। स्थानीय पुलिस को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
बरसात में वाहन नहीं भेजते मेरठ के ट्रांसपोर्टर
केदारनाथ, बद्रीनाथ और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच ट्रांसपोर्टर भी अपनी गाड़ियों को नहीं भेजते हैं। शारदा रोड जिंदल ट्रांसपोर्ट के संचालक विकास ने बताया कि बरसात के इस मौसम में पहाड़ी क्षेत्र में इस सीजन में लैंड स्लाइड का खतरा रहता है। ऐसे में शहर का कोई भी ट्रांसपोर्टर पहाड़ी क्षेत्र में बड़े वाहन नहीं भेजता है।