पुलिस महकमे का एमटी विभाग (मोटर व्हीकल ट्रांसपोर्ट) सिपाही चालकों की कमी से जूझ रहा हैं। हालात यह हैं कि जिले में अनट्रेंड हाथों में पुलिस की गाड़ियों का स्टेयरिंग हैं। 140 गाड़ियों पर 80 चालकों की नियुक्ति है। जिसमें सिर्फ 60 फीसदी चालक ही ऑन ड्यूटी रहते हैं। अधिकारियों की गाड़ियों को छोड़कर थानों व पुलिस लाइन के बंदी वाहन को ऐसे दूसरे सिपाही चला रहे है, जिन्हें चलाने का अधिकार ही नहीं है।
जिले में पुलिस अधिकारियों से लेकर थानों की जीप और बंदी वाहनों की संख्या 140 है। जबकि यूपी 100 की 61 गाड़ियां और बाइक अलग हैं। एडीजी जोन, आईजी रेंज, एसएसपी, एसपी सिटी, एसपी देहात, एसपी क्राइम, एसपी ट्रैफिक और एएसपी कैंट की सरकारी गाड़ियों पर तीन-तीन सिपाही चालकों की नियुक्ति हैं। वहीं अधिकारियों की गाड़ियों के साथ चलने वाली एस्कार्ट गाड़ियों पर अलग से चालक हैं, जबकि पुलिस की अन्य गाड़ियों पर चालक नहीं हैं।
वाहनों की हालत खस्ता
सीओ, थानेदार और बंदी वाहनों की हालत इस समय खस्ता हैं। अधिकांश गाड़ियों पर चालकों की नियुक्ति नहीं हैं। बंदी वाहनों को एमटी विभाग में तैनात सिपाहियों को चलाना पड़ रहा है। कई वाहनों पर चालकों को 24-24 घंटे की ड्यूटी कराना मजबूरी है। वहीं, थानों और सीओ की गाड़ियों पर चालक निर्धारित नहीं है। जिस पुलिस कर्मी पर गाड़ी चलानी आती है, वहीं चालक बनाया हुआ है।
जीप व बोलेरो दौड़ा रहे सिपाही
थानों में अधिकांश जीप और बोलेरो गाड़ियां हैं। जिनको 2015 बैच के सिपाही चला रहे हैं। ड्राइवर उपलब्ध कराने को लेकर रोजाना पुलिस विभाग में रार रहती है। सरकारी वाहनों की देखरेख के लिए पुलिस लाइन में एमटी विभाग बना हुआ है। यह विभाग सरकारी गाड़ियों पर सिपाही चालकों की नियुक्ति के लिए कई बार शासन को चिट्ठी भी भेज चुका है। इसके बावजूद भी कोई सुधार होने को तैयार नहीं।
चालक नहीं बनना चाहते सिपाही
एमटी विभाग प्रभारी इंस्पेक्टर सुभाष सिंह का कहना है कि पुलिस विभाग में सिपाही को चालक पद पर नियुक्त करने के लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करनी होती है। लेकिन पिछले कई वर्षों से चालक बनने का मोह सिपाहियों में खत्म हो गया है। पिछले पांच साल से किसी भी सिपाही ने चालक बनने के लिए एमटी विभाग में आवेदन नहीं किया। एमटी विभाग इस समस्या से रोजाना जूझ रहा है।
यूपी 100 का सेंटर अलग बनेगा
एमटी विभाग की समस्या का समाधान निकालने को कोई तैयार नहीं है। यूपी 100 की गाड़ियों की देखरेख के लिए पुलिस लाइन में अलग से सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है। मेरठ में यूपी 100 की 61 गाड़ियां दौड़ रही हैं। इसका बजट भी अलग से आने की बात चल रही हैं। एमटी विभाग में 140 गाड़ियां है। सवाल उठता है कि आखिर यूपी 100 की गाड़ियों के अलग से सेंटर बनाने की जरूरत क्या है। एमटी विभाग ने स्टाफ बढ़ाने व सुविधा मुहैया कराने की मांग करते हुए यूपी 100 की गाड़ियों की जिम्मेदारी भी संभालने की बात कही है।