हस्तिनापुर। 60 वर्षों का इंतजार अब खत्म होगा। 1960 से 1975 के बीच काफी संख्या में परिवार पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित होकर हस्तिनापुर आए थे। सरकार ने इन्हें जमीन तो दी, लेकिन कानूनी अड़चनों और रिकॉर्ड की गड़बड़ियों के चलते आज तक वह असली मालिक नहीं बन पाए थे। अब इनकी पीढ़ियों को स्थायी और वैध हक मिलेगा।
गत सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय बैठक में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित होकर राज्य के विभिन्न जिलों में बसाए गए परिवारों को भूस्वामित्व का अधिकार देने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से हस्तिनापुर के करीब दो हजार शरणार्थी परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। उन्हें पुनर्वास योजना के तहत मकान, जमीन के मलिकाना हक के साथ-साथ कई लाभ मिलने की उम्मीद जगी है। पूर्वी पाकिस्तान से करीब 407 परिवार विस्थापित होकर हस्तिनापुर में आए थे। अब इन परिवारों की संख्या हजारों में पहुंच गई है। वर्तमान में करीब दो हजार शरणार्थी परिवार हस्तिनापुर में रह रहे हैं। इन्हें परिवारों को अभी तक यहां मलिकाना हक का इंतजार था। (संवाद)
अत्याचार से तंग होकर आए थे हिंदू परिवार
सुखलाल, अमर सरकार, कृष्णा पद हलदर, नेपाल सरकार, कृष्णा मंडल, हरिपद ढाली आदि ने बताया कि पूर्वी पाकिस्तान में लोगों के शोषण से तंग आकर उन्होंने भारत का रुख किया था। लंबे समय से सरकार से मलिकाना हक के लिए पत्राचार के माध्यम से बातचीत चल रही थी। इसका समय-समय पर उन्हें जवाब भी मिलता था।
गांव में बसे, लेकिन रिकॉर्ड में नाम नहीं
कई परिवार दशकों से खेती कर रहे हैं। घर बना चुके हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम नहीं है। अब मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी मामलों की समीक्षा कर जो भी परिवार योग्य हैं, उन्हें राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाए। पहले जिन परिवारों को गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत भूमि दी गई थी, अब उस अधिनियम के खत्म होने के बाद नए कानूनी रास्ते तलाशे जाएं, ताकि किसी भी परिवार को उसके अधिकार से वंचित न रहना पड़े।
नहीं मिलते थे जरूरी दस्तावेज
हिंदू बंगाली परिवारों के लोगों ने बताया कि मालिकाना हक न होने के कारण उन्हें तहसील से आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र एवं मूल निवास आदि के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। अभी तक कई लोगों के पास यह दस्तावेज भी नहीं हैं।
दो हजार परिवार चिह्नित
हस्तिनापुर में ऐसे करीब दो हजार हिंदू बंगाली परिवारों को चिह्नितत किया गया है, जिनके पास मलिकाना हक नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इनकी सूची शासन को भेजी गई है। जल्द ही इन्हें मालिकाना हक मिलेगा। - सुधा खटीक, चेयरपर्सन, नगर पंचायत, हस्तिनापुर