पुलिस के आने में देर होते देख लोगों ने मनीषा को कार से अस्पताल भिजवाया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिसकर्मी की लापरवाही से हुए इस हादसे से लोग भड़क उठे। गुस्साए लोगों ने सोमपाल के शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। लोगों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपी सिपाही को बर्खास्त करने की मांग की।
सूचना मिलते ही सीओ नकुड़ घटनास्थल पर पहुंचे तथा आरोपी सिपाही सुमित के निलंबन का आश्वासन दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद सुबह करीब 10 बजे लगा जाम साढ़े 12 बजे खुल पाया। इस बीच सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। पुलिस की काफी मशक्कत के बाद राजमार्ग पर आवागमन सामान्य हो पाया। पुलिस क्षेत्राधिकारी नकुड़ शिवराज सिंह ने बताया कि मामले की जांच कराकर आरोपी सिपाही के निलंबन की संस्तुति की जाएगी।
सड़क पर पड़ी तड़पती रही घायल
पुलिसकर्मियों की संवेदनहीनता एक बार फिर सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि डंपर चालक को डंडे मारकर पीछे करा रहा सिपाही घायल मनीषा को अस्पताल पहुंचाने की बजाय अपने बचाव में लग गया। आरोप है कि महिला काफी देर तक सड़क पर पड़ी तड़पती रही। सिपाही दूर खड़ा हुआ तमाशा देखता रहा। लोगों का आरोप था कि सिपाही ने डंपर को भगाने में भी चालक की मदद की, लेकिन वह पकड़ा गया।
लाइसेंस से हुई मृतकों की पहचान
पुलिस चौकी के सामने हुए हादसे के बावजूद लोगों को पुलिस को सूचना देनी पड़ी। उसके बाद पहुंची पुलिस ने मृतक सोमपाल की तलाशी ली। जिसमें उसका लाइसेंस मिला। लाइसेंस के आधार पर उसकी पहचान कर उसके परिजनों को सूचना दी गई।