आखिर कब तक जान लेता रहेगा फिटकरी पुल
फिटकरी के ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर कहा कि यहां सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। अंग्रेजी राज में बने इस पुल पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है। दोनों छोर की सड़क चौड़ी है लेकिन पुल संकरा है। रात में यहां पता नहीं चलता और हादसे होते हैं। कोहरे में सबसे ज्यादा हादसे इसी स्थान पर होते हैं। कई बार वाहन गड्ढे में गिर जाते हैं। मंगलवार को भी सेंट्रो कार टक्कर के बाद पुल से नीचे गिरने से बची। रेलिंग न होने की के कारण यदि कार नीचे गिरती तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था। हादसे के बाद आसपास जा रहे लोगों ने भी अपने वाहन सड़क किनारे रोक दिए और घायलों को बस से बाहर निकाला।
सड़क पर मैली डालने को लेकर हंगामा
इस दौरान मौके पर फिटकरी के ग्रामीणों ने सीओ अखिलेश भदौरिया से कहा कि फिटकरी व सैनी में फैक्ट्रियों की मैली सड़क पर डाल दी जाती है। जिससे वाहनों के ब्रेक नहीं लगते और हादसे होने का डर रहता है। जबकि सूखने के बाद यह मैली राहगीरों की आंखों की किरकिरी बनती है। कई बार इसकी शिकायत भी कर चुके हैं। पुल के पास के स्कूल के कर्मचारियों ने बताया कि मैली की दुर्गंध स्कूल तक आती है जिससे छात्रों को परेशानी होती है।
देवेंद्र के परिजनों का हंगामा
देवेंद्र की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंचे परिजनों ने कहा कि देरी से इलाज मिलने के कारण देवेंद्र की मौत हुई है। नहीं तो उसकी जान बच सकती थी।
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