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अमर उजाला की खबर का असर, मुर्दे के एक्सरे करने के मामले में दो जूनियर डॉक्टर सस्पेंड

Wed, 26 Jun 2019 12:54 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सांकेतिक तस्वीर
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मेरठ में मुर्दे का एक्सरे करने के प्रकरण में मंगलवार को दो जूनियर डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया, जबकि ईएमओ, सीनियर और जूनियर चिकित्सकों समेत नौ पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। इनकी भूमिका की जांच की जा रही है। अभी स्टाफ और कई चिकित्सकों ने स्पष्टीकरण दाखिल नहीं किया है। उनका जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि जिन दो जूनियर डॉक्टरों को सस्पेंड किया गया है, वे निकुंज और सुप्रियो हैं। निकुंज सर्जरी विभाग से हैं और सुप्रियो हड्डी विभाग से। इन्होंने अपने सीनियर सलाहकार चिकित्सक से परामर्श नहीं किया और खुद ही एक्सरे करने का निर्णय लिया। जिस पर्चे के आधार पर मृतक के एक्सरे कराए गए, उस पर कंसल्टेंट चिकित्सक का नाम तक नहीं लिखा था। इसी वजह से इन पर कार्रवाई की गई है। इसी से मामला संदिग्ध लगा था और इसकी शिकायत की गई थी। दरअसल, जब मरीज को भर्ती किया जाता है, तो वह किसी चिकित्सक के सुपरविजन में होता है। जब भी उस मरीज से संबंधित कोई जांच होती है, तो उसके पर्चे पर उस चिकित्सक (कंसल्टेंट) का नाम लिखा जाता है। दूसरी तरफ, जहां इस मामले से एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मचा है, तो इसकी गूंज शासन तक भी पहुंच गई है। शासन ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी है। 
 
ये है मामला
20 जून 2019 को मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार सेक्टर-7 में एक व्यक्ति ने तेज रफ्तार कार से कई वाहनों में टक्कर मार दी थी। इस हादसे में एक रिक्शा चालक घायल हो गया था, जिसकी बाद में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मौत हो गई थी। इसी रिक्शा चालक के शव के बिना अनुमति 10 एक्सरे कर दिए गए। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ), जूनियर चिकित्सकों और स्टाफ समेत 11 लोगों से जवाब तलब किया था।

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मौत की वजह जानना चाहते थे
मेडिकल में चिकित्सक और स्टाफ का कहना है कि वे यह जानना चाहते थे कि मृत्यु कैसे हुई है। इसी वजह से एक्सरे किए गए। एक्सरे कराने के बाद तय किया गया कि गंभीर चोटों के आघात के कारण ही रिक्शा चालक की मृत्यु हुई थी। वहीं, सुबह करीब साढ़े 10 बजे घायल को भर्ती कराया गया था। एक्सरे शाम छह और सात बजे के बीच कराए गए। स्टाफ के कुछ लोग दोपहर एक और दो बजे के बीच मौत होना बता रहे हैं, तो कुछ चार बजे के आसपास। 

मेडिकल में पहले भी होती रहीं लापरवाही
मेडिकल कॉलेज में पिछले साल एक व्यक्ति की पथरी की गलत रिपोर्ट बना दी थी। उसमें प्वाइंट लिखना भूल गए थे, जिस कारण पथरी का साइज पढ़कर व्यक्ति परेशान हो गया था। उसने बाद में जिलाधिकारी से शिकायत की थी। साल 2016 में डॉक्टर की लापरवाही से मासूम का आंख की रोशनी चले जाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज दर्ज कराई गई थी।

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