इसके बाद एसडीएम जानसठ इंद्राकांत द्विवेदी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को शांत करते हुए कांजी हाउस का निरीक्षण किया। एसडीएम के कार्रवाई के आश्वासन पर ग्रामीणों ने मृत बछड़ों के शवों को उठने दिया। हंगामा करने वालों में जगपाल सिंह वालिया, सचिन कटारिया, प्रदीप शर्मा, तरुण धीमान, विकास, रूबी कुमार, दीपक वालिया, छोटा, रोहित कुमार आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
कांजी हाउस के हालात बताए
ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि इससे पूर्व भी कई घटनाएं गोवंश के मरने की हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप था की कांजी हाउस में पशुओं के कुंड में पड़े भूसे व पानी के हौज में कीड़े पैदा हो रहे हैं। कांजी हाउस में 14 गोवंश मौजूद है, जिन को भरपेट चारा नहीं दिया जाता है। साथ ही उनकी देखरेख के लिए उचित व्यवस्था भी नहीं की गई है।
तीन चिकित्सकों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
डीएम के आदेश पर दोनों मृत बछड़ों का पोस्टमार्टम तीन पशु चिकित्सा अधिकारियों के पैनल ने किया। पैनल में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हेमेंद्र कुमार, मोरना के डॉक्टर अखिलेश कुमार, ककरौली पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हरेंद्र कुमार शामिल रहे। डॉ. हेमेंद्र कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम में बछड़ों की मौत कुत्तों के नोचने के कारण हुई है। बछड़ों के शवों को जमीन में गड्ढा खोदकर दबा दिया गया।
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