संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के नंदीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान में दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने शामिल होकर जाप अनुष्ठान एवं मुख्य वेदी के अभिषेक के उपरांत विधान स्थल पहुंचकर अभिषेक व शांतिधारा की। ज्ञान भूषण महाराज ने कहा कि सच्ची भक्ति केवल कर्मकांड या बाह्य क्रियाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उसमें ज्ञान वैराग्य और अनुराग का समन्वय होना आवश्यक है।
शांतिधारा के पश्चात नंदीश्वरद्वीप जिनालय में पूजा-अर्चना की गई। श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान करते हुए 32 अर्घ्य मांडले पर समर्पित किए गए। क्षेत्र पर विराजमान आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने कहा कि भोगों का स्वाद मनुष्य के लिए लाभकारी नहीं है। मनुष्य को भोगों के स्वाद से बचना चाहिए। हमें शुद्ध शाकाहार भोजन करना चाहिए। रात में भोजन व पानी का त्याग अवश्य करें और अपनी आत्मा को भक्तिमय अमृत धारा पिलाएं। कहा कि आत्मा ही परमात्मा का अंश है। आत्मा को शुद्ध करना ही समाधिकरण है। आत्मा अमर अजर है, उसका कोई छेदन नहीं कर सकता। भगवान की सच्ची भक्ति केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भक्ति में ज्ञान वैराग्य और अनुराग का समन्वय होना आवश्यक है।
सायंकालीन सभा में मंगल आरती भजन व 48 दीपकों से भक्तामर का पाठ व भक्ति कार्यक्रम किया गया। प्रश्नमंच का भी आयोजन किया गया। इसमें उत्तर प्रांतीय गुरुकूल के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, राजेंद्र जैन, राजीव जैन, सुनील जैन, अनिल जैन, जितेंद्र जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
प्राचीन दिगम्बर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर