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Meerut News: धूल के गुबार से मेरठ-गढ़ हाईवे पर बढ़ी परेशानी

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माछरा। काफी समय से मेरठ-गढ़ (709ए) हाईवे का चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। कार्य में प्रगति नहीं होने के कारण निर्माण कार्य काफी पिछड़ गया है। सड़क निर्माण के साथ हाईवे पर बनाए जा रहे बाईपास जरूर आकार लेने लगे हैं, लेकिन मुख्य मार्ग पर स्थिति जस की तस है। कार्य तेजी से न होने का खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। काम की धीमी रफ्तार से हाईवे निर्माण का लक्ष्य भी पिछड़ रहा है।
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कुल 50.18 किलोमीटर लंबे मेरठ-गढ़ हाईवे का चौड़ीकरण का कार्य टाटा कंपनी द्वारा किया जा रहा है। हाईवे पर गढ़ से मेरठ के बीच 32 किलोमीटर क्षेत्र में पुरानी सड़क का ही जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जबकि 18 किलोमीटर सड़क बाईपास के रूप में नई बनाई जा रही है, लेकिन पिछले कुछ महीने से बाईपास का निर्माण को छोड़ दें तो मुख्य सड़कों का निर्माण रुका हुआ है। इस पर बड़ी सुस्ती के साथ काम चल रहा है। वहीं माछरा स्टैंड के पास बने अंडरपास के पास काफी बड़ा रेत का टीला बना हुआ है, जो जरा सी हवा चलने के बाद आसपास के क्षेत्र को धूल में तब्दील कर देता है। रेत के टीले पर पानी की डालने की व्यवस्था भी चरमराई हुई है। आसपास दो पेट्रोल पंप, इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज मौजूद हैं। स्कूल आते-जाते छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं क्षेत्र के दोपहिया और चौपहिया वाहन सवार लोग भी पेट्रोल व डीजल लेने के लिए पेट्रोल पंप पर रुकते हैं तो धूल से वह भी अपने आप को बचा नहीं पाते हैं। इससे लोगों में रोष है।
लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष तक कार्य पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक मात्र 40 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है।

दरअसल, काम कर रही संस्था का फिलहाल बाईपास बनाने पर ही जोर है। जबकि काली सड़क का हिस्सा जस का तस पड़ा हुआ है। इनमें हसनपुर और किठौर बाईपास पर तेजी से कार्य चल रहा है। यहां दो फ्लाईओवर का भी निर्माण हो रहा है। एक अमरपुर मार्ग और दूसरा किठौर-हापुड़ मार्ग पर शामिल है। सबसे लंबे आठ किलोमीटर के किठौर बाईपास का काम 40 प्रतिशत कर लिया गया है। लेकिन यह कार्य भी अब धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में लोगों में रोष व्याप्त हो रहा है। शासन से भी इस पर नाराजगी जताई गई है।
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क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अगर इस तरह धीमी गति से सड़क का निर्माण चलता रहा तो जिस सड़क का निर्माण हो गया है, वह भी टूटने लगेगी। क्षेत्र के लोगों की परेशानी जस की तस बनी रहेगी। ग्रामीणों ने कहा कि यह धूल के गुबार से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। क्योंकि यही धूल सांस लेने पर उनके फेफड़ों में जमा हो रही है और कहीं न कहीं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रही है।
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