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तीन तलाक का दर्द: लाखों सपने लेकर ससुराल में रखा था कदम, मगर तन्हा तय किया उम्र का लंबा सफर...

Thu, 20 Sep 2018 02:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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तीन तलाक पीड़ित आतिया साबरी व जैमिनी चौधरी दाएं - फोटो : अमर उजाला
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तीन तलाक का दंश झेल रही पीड़िताओं ने ट्रिपल तलाक अध्यादेश को मंजूरी को बड़ा फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि कानून बनने के बाद अब शौहर तीन तलाक बोलकर महिलाओं पर ज्यादती नहीं कर पाएंगे। सहारनपुर की आतिया साबरी पहली ऐसी महिला हैं जो ट्रिपल तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची और जंग जीतकर ही लौटी। आतिया साबरी ने तीन तलाक अध्यादेश को मंजूरी पर मोदी सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कानून बनना जरूरी था। इस कानून के बाद तलाक का दुरुपयोग रुक जाएगा। 

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आतिया का निकाह 25 मार्च को हरिद्वार जिले के खानपुर थाने के जसोधर गांव निवासी वाजिद के साथ हुआ था। दो बेटियां होने के बाद 12 दिसंबर 2015 को उन्हें जहर देकर मारने का प्रयास किया गया। दस रुपये के स्टांप पर तीन तलाक लिखकर उनके घर भेजा गया था। 

जाएं तो कहां जाएं जैमिन और इमराना

बिजनौर के किरतपुर के मोहल्ला लोहरान निवासी जैमिन चौधरी के साथ भी यही हुआ। जैमिन का निकाह करीब नौ साल पहले मोहल्ला कस्साबान निवासी तौफिक से हुआ था। जैमिन को दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू किया गया और तीन महीने बाद उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। कह दिया कि जैमिन को तीन तलाक दे दिया है। तौफिक ने दूसरा निकाह कर लिया। जैमिन ने इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया तो तौफिक ने दो बार जानलेवा हमले किए। 

फोन पर सिर्फ तीन शब्द कहे

बिजनौर के ही गांव आदमपुर निवासी इमराना ने निकाह के बाद ससुराल में कदम रखा था तो आंखों में बहुत सपने थे। गांव सल्लाहपुर निवासी शहजाद से निकाह के तीन साल बाद एक बेटा और एक बेटी पैदा हुए। पति शहजाद मुंबई में काम करता था। उसने वहीं से सल्लाहपुर में इमराना को फोन किया और तलाक दे दी। 

तीन तलाक में कत्ल
नूरपुर क्षेत्र में एक महिला का कत्ल भी तीन तलाक के चक्कर में हुआ था। महिला के पति ने उसे तीन तलाक दे दिया था। बाद में पछतावा होने पर उसने पत्नी का हलाला कराया। लेकिन हलाला करने वाले दोस्त ने तलाक से इंकार कर दिया।
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कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए: रेहाना    

मुजफ्फरनगर की रेहाना अदीब - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर में सामाजिक संस्था 'अस्तित्व' की अध्यक्षा रेहाना अदीब केंद्र सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक पर लाए गए अध्यादेश को लेकर आशंकित है। उनका कहना है कि सीधे मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई से कानून का दुरुपयोग होगा। अध्यादेश में कुछ पेचीदीगियां है। हमारा उद्देश्य किसी का घर तोडऩा नहीं है। अध्यादेश के हिसाब से सीधे मुकदमा कर जेल भेजने का प्रावधान है। ऐसे में तलाक पीड़िता के बच्चों का खर्च कौन देगा? सबके घरों में रोज उठा पटक होती है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते हैं। ऐसे में इसका दुरुपयोग नहीं होगा, यह कैसे कहा जा सकता है? हालांकि अभी अध्यादेश आया है, कानून नहीं बना है, इसमें समय लगेगा। रेहाना  कहती हैं कि हमें इस तरह का रास्ता निकालना होगा कि तलाक से पहले ही विवाद को निपटाएं। हाल ही में हमारें सामने एक ऐसा ही मामला आया। तलाक की स्थिति बनी थी, दोनों को समझाया गया तो मान गए। 

हमें अब तक न हलाला का कोई केस नहीं मिला। हमारा संगठन तो ऐसों का ईलाज करता है। उनका कहना है कि इस समय परिवार न्यायालयों, शरई अदालतों और हमारे यहां नारी अदालतों में पीडित मुस्लिम महिलाओं की भरमार है।  हम नहीं चाहते कि तीन तलाक के फर्जी मामले दर्ज हों।
 
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