सहारनपुर में तीन तलाक का दंश झेल रही पीड़िताओं ने ट्रिपल तलाक अध्यादेश को मंजूरी को बड़ा फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि कानून बनने के बाद अब शौहर तीन तलाक बोलकर महिलाओं पर ज्यादती नहीं कर पाएंगे। बड़ी बात यह है कि जुल्म ज्यादती के खिलाफ महिलाओं को आवाज उठाने का हक मिल गया है। सजा के प्रावधान से तीन तलाक पर अंकुश लगेगा।
तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर करने वाली सहारनपुर निवासी आतिया साबरी ने तीन तलाक अध्यादेश को मंजूरी पर मोदी सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कानून बनना जरूरी था। इस कानून के बाद उल्लंघन रुक जाएगा। बता दें कि साबरी का निकाह 25 मार्च को हरिद्वार जिले के खानपुर थाने के जसोधर गांव निवासी वाजिद के साथ हुआ था। दो बेटियां होने के बाद 12 दिसंबर 2015 पर जहर देकर मारने का प्रयास किया। दस रुपये के स्टांप पर तीन तलाक लिखकर उसके घर भेजा गया था। बाकायदा दारुल उलूम से तलाक को लेकर फतवा भी जारी कराया गया था। पीड़िता साबरी ने 2016 में दोषियों को सजा दिलाने के लिए 2016 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। साबरी का कहना था कि जब निकाह के वक्त पति और पत्नी की सहमति जरूरी है तो तलाक एक तरफा कैसे हो सकता है। साबरी बुधवार को अध्यादेश को मंजूरी के बाद खासी उत्साहित थी।