traveling in roadways became insecure
मेरठ। हादसे में 29 यात्रियों की मौत के बाद चेता रोडवेज लंबे रूटों पर डबल ड्राइवर (दो चालक) भेज रहा है। लेकिन इस योजना के आड़े संविदा परिचालकों को प्रति किलोमीटर के हिसाब से मिलने वाले मानदेय की कमाई आ गई है। रूट के निर्धारित किलोमीटर अब दो संविदा चालकों के बीच बंटने से मानदेय घट गया है। ऐसे में संविदा चालक ज्यादा किलोमीटर देने या फिर लंबे रूटों के चालकों को ज्यादा मानदेय दिलाने की मांग कर रहे हैं। संविदा चालकों का कहना है कि 6 से 7 हजार रुपये में उनके घर का खर्च नहीं चल पा रहा है।
जनरथ बस हादसे का कारण जांच में चालक को नींद आना माना गया था। दुर्घटनाग्रस्त जनरथ बस सेवा पर एक ही चालक था। अत्यधिक थकान होने के कारण चालक को झपकी आने से बस अनियंत्रित होकर नाले में गिर गई थी। भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों का सफर सुरक्षित बनाने के लिए विभाग ने 300 किलोमीटर से ज्यादा लंबे रूटों पर चलने वाली बसों में अब दो चालकों की व्यवस्था की है। लेकिन अब योजना का विरोध होना शुरू हो गया है। विभाग के संविदा चालकों ने लंबे रूटों पर दो चालकों की ड्यूटी का विरोध किया है। उनका कहना है कि वर्तमान में मेरठ से जयपुर, बालाजी, अलवर, अजमेर, मेरठ-दिल्ली-मेरठ-देहरादून और ऋषिकेश जैसे लंबे रूटों पर चलने वाले चालकों के महीने में 6 से 7 हजार किलोमीटर हो जाते हैं। प्रति किलोमीटर मानदेय और इंसेंटिव मिलाकर चालक को 16-17 हजार रुपये मिलते हैं। लेकिन जब बसों पर दो चालकों की व्यवस्था की गई है तब से किलोमीटर घटकर आधे रह गए हैं और मानदेय भी आधा रह गया है।
ऐसे रूटों पर लगाने होंगे नियमित चालक
संविदा चालकों के हाथ खड़े करने पर विभाग के सामने लंबे रूटों पर नियमित चालकों को लगाने का विकल्प बचा है। लेकिन विभाग के पास नियमित चालकों का पहले से ही टोटा है। चालकों की कुल संख्या के सापेक्ष केवल 25 से 30 फीसदी नियमित चालक हैं। इसमें से 10 फीसदी चालक रूट पर न चलकर विभिन्न अनुभागों में सेवा दे रहे हैं। 70 से ज्यादा चालक अक्षम हो गए हैं।
रीजन में चालकों-परिचालकों की संख्या
डिपो चालक-परिचालक
मेरठ 625
भैसाली 400
बड़ौत 400
सोहराब गेट 750
गढ़मुक्तेश्वर 390
कुल 2565
इसका विकल्प तलाश रहे हैं
लंबे रूटों की बसों में दो चालक भेजे जा रहे हैं। ये बात सही है कि बस पर दो संविदा चालकों के चलने से उनके बीच किलोमीटर का बंटवारा हो रहा है। इससे उनका मानदेय प्रभावित हो रहा है। इसका विकल्प तलाशा जा रहा है कि इसे कैसे सही किया जाए। - नीरज सक्सेना, आरएम मेरठ रीजन