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यह VIP एक्सप्रेस अगर समय से होती तो हो जाता और भयंकर हादसा

Sun, 20 Aug 2017 03:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर, मेरठ
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बड़ा ट्रेन हादसा
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अगर शनिवार को 36 मिनट देर नहीं हुई होती तो हादसे का शिकार जनशताब्दी एक्सप्रेस होती। मेरठ कैंट स्टेशन पर करीब चार घंटे तक खड़ी रही जनशताब्दी एक्सप्रेस को वापस कर वाया हापुड़-मुरादाबाद के रास्ते देहरादून भेजा गया। पुरी (उड़ीसा) से हरिद्वार जाने वाली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस का मेरठ सिटी स्टेशन पर आगमन शाम 4 बजकर 51 मिनट का है। यहां ट्रेन का स्टॉपेज 2 मिनट का है। शनिवार को यह ट्रेन 15 मिनट लेट होकर शाम 5 बजकर 8 मिनट पर अपने निर्धारित प्लेटफार्म नंबर 3 पर पहुंची थी। दो मिनट बाद यह ट्रेन 5 बजकर 10 मिनट पर हरिद्वार के लिए रवाना हुई। लेकिन 36 मिनट बाद खतौली पहुंची यह ट्रेन 5 बजकर 46 मिनट पर हादसे का शिकार हो गई। वहीं, दिल्ली से देहरादून जाने वाली सुपर फास्ट जनशताब्दी एक्सप्रेस का सिटी स्टेशन पर आने का समय शाम 4 बजकर 40 मिनट है। शनिवार को यह ट्रेन 36 मिनट की देरी से सिटी स्टेशन पर शाम 5 बजकर 16 मिनट पर पहुंची। उत्कल एक्सप्रेस इससे पहले ही हरिद्वार के लिए रवाना हो चुकी थी। अगर जनशताब्दी एक्सप्रेस लेट नहीं होती तो ये हादसा जनशताब्दी के साथ होता।
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लापरवाही ने कराया बड़ा रेल हादसा

रेल हादसा
खतौली में हुए रेल हादसे के पीछे रेलवे की लापरवाही भी सामने आ रही है। ट्रैक क्षतिग्रस्त है, यह बात जानकारी में होने के बाद भी विभाग इस हादसे को नहीं रोक पाया, इससे कई सवाल उठ रहे हैं। क्या ट्रैक क्षति का आकलन ठीक से नहीं किया गया। बड़ा सवाल यह उठ  रहा है कि जिस ट्रैक की पटरी को बदला गया था, उस पर तेज रफ्तार से ट्रेन कैसे दौड़ रही थी। सही स्थिति तो जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन यह रेल हादसा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर गया है। बताया जा रहा है कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की रफ्तार करीब 105 किमी प्रति घंटा थी। रेल यात्रियों ने भी बताया कि ट्रेन की स्पीड काफी तेज थी। अचानक ब्रेक लगाए जाने को हादसे की एक वजह बताया जा रहा है। शुक्रवार रात में ही पटरी में क्रेक आ गया था और क्षतिग्रस्त ट्रैक से ही करीब 12 ट्रेनें गुजरीं। रात में रेलवे विभाग को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। जिस कारण रात में शालीमार, इंटरसिटी, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस मालगाड़ी सहित करीब एक दर्जन ट्रेनें इस टूटे हुए ट्रैक से धड़ाधड़ गुजरती रही। शनिवार की सुबह पेट्रोलिंग के दौरान ट्रैक क्षतिग्रस्त होने का पता चला सका। जिसके बाद रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। सभी ट्रेनें को धीमी गति से निकलवाया गया और क्षतिग्रस्त हुए हिस्से को बदला गया। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त ट्रैक या जिस ट्रैक की मरम्मत की जा रही हो, उस पर कासन देकर ट्रेनों को मात्र 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारा जाता है। अब सवाल है कि कलिंग उत्कल कैसे यहां से 105 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरी। उसे कासन नहीं दिया गया था या फिर ट्रेन के चालक ने कासन नहीं देखा। हादसे से पहले स्टेशन मास्टर राजेंद्र कुमार ने बताया था कि  रेलवे ट्रैक के क्रेक होने की जानकारी मिलने पर उस टुकड़े को बदलवा दिया गया है। ट्रैक अक्सर क्रेक हो जाते हैं। इस पर से ट्रेनों के गुजरने से कोई नुकसान नहीं होता है। ट्रैक को चेक करने को लगातार पेट्रोलिंग की जाती है। उनका बयान ही यह बता रहा है कि उन्होंने उस समय किस तरह से ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने की घटना को लिया था।

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