बताया गया कि मनसब दो भाइयों में बड़ा था और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। पिता इरफान भी फेरी का काम करते हैं और छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है।
गांव के प्रधान शोयब ने बताया कि मनसब की शादी अगले महीने छुटमलपुर में तय थी और घर में तैयारियां ज़ोरों पर थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। जिस बेटे को पिता इरफान घोड़ी पर देखना चाहते थे, उसी के जनाजे को कांधा देना पड़ा।
चार साल पहले बहन की बीमारी से मौत और अब बेटे की सड़क दुर्घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। गांव में शोक की लहर है, हर आंख नम है।