सेंट्रल मार्केट में कार्रवाई से पहले धरने पर मौजूद व्यापारियों को संबोधित करते सपा विधायक अतु
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शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में मंगलवार को दिनभर तनाव की स्थिति बनी रही और भारी पुलिस बल तैनात रहा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 44 अनाधिकृत निर्माणों को सील करने के आदेश के बाद व्यापारियों में भारी रोष देखने को मिला। व्यापारियों ने मुख्य सेंट्रल मार्केट को पूरी तरह बंद रखा और धरना-प्रदर्शन किया।
सीलिंग की कार्रवाई की आहट के बीच मंगलवार सुबह स्कूलों में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई। सुबह-सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने आए अभिभावकों की स्कूल प्रबंधन से तीखी झड़प हुई और उनमें खासा आक्रोश देखा गया।स्कूल प्रबंधन ने हाफ-डे घोषित कर दिया और अभिभावकों को फोन कर तुरंत बच्चों को ले जाने के लिए बुलाया। वहीं अस्पतालों की स्थिति भी गंभीर रही। दिनभर मरीजों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करने का सिलसिला चलता रहा और नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और पूर्व कमिश्नर को फटकार
मामले की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने की। आवास एवं विकास परिषद ने सेंट्रल मार्केट के 859 भूखंडों में से 44 ऐसे भवनों की सूची पेश की है जो पूर्णतः व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त हैं। अदालत ने इस मामले में पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद के उस पुराने आदेश पर कड़ा ऐतराज जताया जिसमें उन्होंने 27 अक्तूबर 2025 को ध्वस्तीकरण पर रोक लगाते हुए मास्टर प्लान में संशोधन के जरिए सेंट्रल मार्केट को बाजार स्ट्रीट घोषित करने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन माना और पूर्व कमिश्नर से पूछा कि किन परिस्थितियों में ऐसा आदेश पारित किया गया। अदालत ने उन्हें इस पर विस्तृत ब्यौरा और माफीनामा पेश करने का निर्देश दिया है।
9 अप्रैल को मेरठ बंद की तैयारी
शाम होते ही जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश पोर्टल पर अपलोड हुआ व्यापारियों की बेचैनी और बढ़ गई। सीलिंग की आशंका को देखते हुए कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों से सामान खाली करना शुरू कर दिया। इस बीच संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों ने एकजुटता दिखाते हुए बैठक की। नवीन गुप्ता और अजय गुप्ता ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि इस कार्रवाई के विरोध में 9 अप्रैल (बृहस्पतिवार) को पूरा मेरठ बंद रखा जाएगा।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के अनुसार कोर्ट ने मानवीय पहलुओं को देखते हुए स्कूल के बच्चों के दाखिले और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सुरक्षित शिफ्ट करने के लिए अगली सुनवाई तक का समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी जिसमें मुख्य सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) तथा आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी. गुरुप्रसाद ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहेंगे। फिलहाल पुलिस प्रशासन को इस पूरी कार्रवाई को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दी और सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।