- राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के शिवभक्तों से शिवमय हुआ कांवड़ मार्ग
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली की ओर जा रहे शिवभक्तों की आस्था के आगे दर्द और थकान भी बेअसर नजर आई। गंग नहर के चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर बुधवार को हजारों कांवड़िये बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे।
लंबी पैदल यात्रा के कारण कई शिवभक्तों के पैरों में छाले पड़ चुके थे, लेकिन इससे उनके कदम नहीं रुके। दर्द की परवाह किए बिना श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का स्मरण करते हुए लगातार आगे बढ़ते रहे। कई कांवड़िये नंगे पांव यात्रा करते दिखे तो कुछ साथी एक-दूसरे का सहारा बनकर मंजिल की ओर बढ़ते रहे। कांवड़ मार्ग पर भगवान शिव की आकर्षक झांकियां, डीजे पर बजते शिव भजन और बोल बम के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के चित्रों वाली टी-शर्ट और भगवा वस्त्र पहनकर यात्रा करते नजर आए। कई कांवड़ियों ने भगवान शिव और उनके गणों के स्वरूप वाले मुखौटे पहनकर भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। मार्ग पर जगह-जगह लगाए गए सेवा शिविरों और भंडारों में ग्रामीणों व सामाजिक संगठनों ने शिवभक्तों के लिए भोजन, पेयजल, दवा और विश्राम की व्यवस्था की।
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मन्नत पूरी हुई तो उठा ली कांवड़
हरियाणा के शिवभक्त हिमेंद्र सिंह ने बताया कि वह 14 वर्षों से लगातार हरिद्वार से कांवड़ ला रहे हैं। उन्होंने भगवान शिव से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी थी। मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने प्रत्येक वर्ष कांवड़ लाकर जलाभिषेक करने का संकल्प लिया, जिसे आज भी निभा रहे हैं।
देवीसिंह ने बताया कि उनका पुत्र यश गंभीर बीमारी से पीड़ित था। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से पुत्र के स्वस्थ होने की प्रार्थना की थी। मन्नत पूरी होने और पुत्र के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद वह हर वर्ष कांवड़ यात्रा में शामिल होकर जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु हंसराज सिंह, कर्मपाल, नारायण और ऊषा की आस्था भी उनकी व्यक्तिगत मनोकामनाओं से जुड़ी है। इन श्रद्धालुओं का कहना है कि कांवड़ यात्रा उनके लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
दिल्ली निवासी दंपती युवराज और मोहिनी अपने पुत्र शशांक के साथ पहली बार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनकी संतान प्राप्ति की मनोकामना भगवान शिव की कृपा से पूरी हुई। इसी खुशी और आस्था के भाव से वह अपने पुत्र के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर जलाभिषेक के लिए निकले हैं। उनका कहना है कि भगवान शिव ने उनकी झोली खुशियों से भर दी।
दिल्ली निवासी सावित्री देवी ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करती आ रही हैं। इस बार वह पौत्र विवेक के साथ कांवड़ यात्रा कर रही हैं। कक्षा पांचवी के छात्र सूरज ने बताया कि उसने अपने सबसे छोटे मामा को संतान प्राप्ति की कामना के साथ पहली बार हरिद्वार से कांवड़ उठाने का संकल्प लिया है।