उन्होंने 2011 में प्रदेश स्तरीय एथलेटिक चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। पांच किलोमीटर की वॉक में स्वर्ण पदक लेने के साथ ही प्रियंका प्रदेश की बेस्ट एथलीट भी बनी। उसी साल नेशनल यूथ एथलेटिक चैंपियनशिप में भी पांच किमी वॉक में हिस्सा लिया और रजत पदक जीता।
साल 2011 से 2013 के दौरान अंडर-18 आयु वर्ग में ही प्रियंका ने तीन स्वर्ण पदक, तीन रजत पदक और दो कांस्य पदक जीत लिया। जिसके बाद 10 किमी. व 20 किमी. पैदल चाल में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार रिकॉर्ड तोड़ते हुए पदक हासिल किए। कोच गौरव त्यागी को यकीन था कि प्रियंका एक दिन ओलंपिक जरूर खेलेगी।
हाल में रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड मिला
प्रियंका को पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड के लिए भी चुना गया था। बेंगलुरु में राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप के कैंप में प्रशिक्षण करने के कारण प्रियंका लखनऊ में सम्मान समारोह में वो नहीं पहुंच सकी। प्रियंका गोस्वामी की राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेस वॉक में उपलब्धियों को देखते हुए ही उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया था।
रांची में ओलंपिक कोटा हासिल करने के बाद इस साल के टोक्यो ओलंपिक्स में रेस वॉक में भारत के पदक जीतने की उम्मीद और बढ़ गई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेरठ का डंका बजाया है। कोच गौरव त्यागी व क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने प्रियंका के कोटा हासिल करने पर बधाई दी। मेरठ से अभी तक शूटिंग में सौरभ कुमार व एथलीट प्रियंका गोस्वामी ओलंपिक के लिए कोटा हासिल कर चुकी हैं।